अब एफपीपीएएस से तय हाेगी हर माह बिजली की कीमत - realtimes
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अब एफपीपीएएस से तय हाेगी हर माह बिजली की कीमत

रायपुर(realtimes) देश भर में जिस तरह से हर माह रसाेई गैस की कीमत तय होती है, अब ठीक उसी तरह से देश भर में बिजली की कीमत भी हर माह तय हाेगी।यही वजह है कि प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं से लिए जाने वाले वीसीए को बंद कर दिया गया है। केंद्रीय सरकार के निर्देश पर छत्तीसगढ़ राज्य बिजली नियामक आयोग ने अब उत्पादन लागत के अंतर की राशि को उपभोक्ताओं से वसूलने के लिए नया फार्मूला फ्यूल पॉवर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज (एफपीपीएएस) लागू कर दिया है। नए टैरिफ के साथ ही इसको नए सत्र से लागू किया जा रहा है। ऐसे में प्रदेश भर के बिजली उपभोक्ताओं से इसी नए फार्मूले के तहत ही अप्रैल के अंतर की राशि मई के बिल में वसूली जाएगी।
छत्तीसगढ़ राज्य बिजली नियामक आयोग ने छत्तीसगढ़ राज्य पॉवर कंपनी को टैरिफ के अलावा वेरिएबल कॉस्ट एडजेस्टमेंट (वीसीए) के माध्यम से अब तक उपभोक्ताओं से उत्पादन लागत की अंतर की राशि लेने का प्रावधान बनाकर रखा था। वीसीए में दो माह के उत्पादन लागत की समीक्षा करके उपभोक्ताओं से वीसीए लिया जाता है। इसके तहत हर दो माह में वीसीए का शुल्क कम ज्यादा होता है। लेकिन अब केंद्र सरकार के निर्देश से वीसीए को मई से बंद कर दिया गया है।
अब एफपीपीएएस का नया फार्मूला
वीसीए के स्थान पर फ्यूल पॉवर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज (एफपीपीएएस) का नया फार्मूला लागू किया गया है। इसमें गणना के मुताबिक की उपभोक्ताओं से प्रतिशत के हिसाब से उत्पादन लागत की अंतर की राशि ली जाएगी। पॉवर कंपनी की ज्यादातर बिजली एनटीपीसी से आती है। इसी के साथ कंपनी का अपना भी उत्पादन होता है। कुल मिलाकर अपनी और बाहर की बिजली को मिलाकर उत्पादन लागत में जो अंतर आएगा, उसके हिसाब से उपभोक्ताओं के बिल में हर माह यह राशि जुड़ेगी।
अप्रैल का पैसा मई के बिल में
नए फार्मूले को नए सत्र अप्रैल से लागू किया जा रहा है। अब तक उपभोक्ताओं से दिसंबर तक का वीसीए लिया जा चुका है। जनवरी, फरवरी और मार्च के वीसीए को न लेकर इनको टैरिफ में टू अप यानी उसमें समायोजित किया जाएगा। अप्रैल में जो भी उत्पादन लागत ज्यादा आएगी, उसको मई के बिल में उपभोक्ताओं से वीसीए के स्थान पर एफपीपीएएस नाम से कालम प्रारंभ करके लिया जाएगा। मई का बिल जून में आएगा। इसके बाद नियमित रूप से हर माह की राशि की गणना करके वीसीए की तरह ही उपभोक्ताओं से टैरिफ के अतिरिक्त यह राशि ली जाएगी।
हर माह कम ज्यादा होगी कीमत
नए फार्मूले के बाद अब बिजली की कीमत हर माह कम ज्यादा होगी। उपभोक्ताओं काे जो टैरिफ के हिसाब से पैसे लगते हैं वो तो फिक्स हैं, लेकिन उत्पादन लागत के हिसाब से जो ज्यादा पैसे लगेंगे उससे हर माह बिजली की कीमत में अंतर आएगा। कभी ज्यादा लागत हो गई तो ज्यादा पैसे लगेंगे, कभी लागत कम हो गई तो कम पैसे लगेंगे। यह भी संभव है की नियामक आयोग द्वारा तय लागत आएगी तो कोई भी अंतर की राशि उस माह नहीं लगेगी।

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