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ख़ास ख़बर: RSS के शताब्दी वर्ष के लिए भी रायपुर में बनी बड़ी याेजना

समन्वय समिति की अखिल भारतीय बैठक में कई मुद्दाें पर बनी रणनीति

रायपुर(realtimes) राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के की राजधानी रायपुर में हुई समन्वय समिति की अखिल भारतीय बैठक में आरएसएस के शताब्दी वर्ष काे लेकर भी बड़ी याेजना बनी है। इसमें लंबे समय तक आरएसएस से जुड़े सभी 36 संगठन अपने-अपने स्तर पर कार्यक्रम करेंगे। हालांकि क्या-क्या कार्यक्रम हाेंगे इसका खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन आने वाले समय में इसकी जानकारी सामने आएंगी। बैठक में कई मुद्दों पर चर्चा की गई है। जिन मुद्दों पर बात हुई है, उसमें से कुछ बातों की जानकारी आरएसएस के सह सरकार्यवाह डॉ. मनमोहन वैद्य ने मीडिया से साझा की है।

समन्वय समिति की बैठक के बारे में जानकारी देते हुए डॉ. मनमोहन वैद्य ने बताया, बैठक में मुख्यत: शामिल संगठनों ने अपने अनुभव साझा किए हैं। वास्तव में इस बैठक में किसी तरह के निर्णय जैसा कुछ नहीं था। सभी संगठन अपने निर्णय करने के लिए सक्षम हैं। बैठक में कई मुद्दों पर चर्चा हुई है उसमें स्कूलों में हिदुंत्व की पढ़ाई होनी चाहिए। न्यायालयों में कामकाज की भाषा भारतीय होनी चाहिए, स्वदेशी चीजों को बढ़ावा मिलना चाहिए। भारत के भौतिक और आर्थिक विकास पर भी चर्चा की गई। डॉ. वैद्य ने बताया कि जो हमारे से जुड़े संगठन हैं वो क्या काम कर रहे हैं इसकी जानकारी यहां साझा की गई। विद्यार्थी परिषद ने दो लाख स्कूलों में अलग-अलग काम किए। 87 हजार स्थानों पर तिरंगा फहराया गया। संस्कार भारतीय ने वंदे मातरम का स्मरण किया। कलाकारों के संगठन ने नाटकों का मंचन किया।

भारत को जोड़ने पर मंथन
डॉ. वैद्य ने कहा, भारत काे जोड़ने वाला स्व कैसे प्रगट हो इस पर चिंतन हुआ। भारत के स्व को समझना जरूरी है। स्व का आधार आध्यात्मिक है। राम भक्ति उत्तर और दक्षिण में ज्यादा देखने को मिलती है, कृष्ण भक्ति पूर्व और पश्चिम में है। शिव भक्ति हर जगह है। इन तत्वों को मजबूत करना ही स्व है। इससे ही भारत जुड़ेगा।
हिंदुत्व की पढ़ाई पर फाेकस
श्री वैद्य ने कहा कि बैठक में ये तय किया गया कि देश के स्कूलों में हिंदुत्च की पढ़ाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यूएस और यूके में हिंदुत्व की पढ़ाई हो रही है तो यहां भी होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जीडीपी के स्थान पर भारतीय मानक इंडेक्स तैयार करने पर भी विचार जाना चाहए। उन्होंने कहा, आज ब्रांडेड चीजें का उपयोग ज्यादा हो रहा है। ऐसा होने से स्थानीय कामगारों को काम नहीं मिल पा रहा है। स्वदेशी चीजें कम बिक रही है। स्वदेशी चीजों के उपयोग पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।
जैविक खेती पर जोर
बैठक में शामिल किसान संघ की तरफ से देश में जैविक खेती पर जोर देते हुए, इसको ज्यादा से ज्यादा बढ़ाना देने की बात की गई। देश में जैविक खेती हो रही है, लेकिन इसका प्रतिशत कम है। उन्हाेंने कहा, स्नातक करने वाले युवा खेती नहीं करते हैं। इनको भी खेती से जाेड़ना होगा।
हिंदू राष्ट्र का मतलब समाज है
डॉ. वैद्य ने हिंदु राष्ट्र की मांग के सवाल पर कहा, राष्ट्र मतलब समाज होता है। समाज यहां हिंदू ही है, उन्होंने कहा, रविंद्र नाथ टैगोर ने एक बात कही थी। उन्होंने अनेकता में एकता देखना यही भारत में सबसे बड़ा धर्म है। धर्म का मतलब यहां रिलिजन से नहीं है। इसलिए भारत विविधता को भेद नहीं मानता, पराए को दुश्मन नहीं समझता। श्री टैगोर ने कहा था, भारत में हिंदू, मुसलमान लड़ते दिखेंगे। मगर मर नहीं जाएंगे, वह सामंजस्यता स्थापति करेंगे, वही हिंदुत्व होगा।
तिरस्कार के आधार पर कैसे जुड़ेगा भारत

कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा के सवाल पर डॉ. वैद्य ने कहा, भारत को जोड़ने का काम कोई भी करेगा तो अच्छी बात है। उसका स्वागत है। लेकिन यह देखने वाली बात है कि यात्रा का आधार क्या है। भारत की पहचान भारतीय आध्यात्मिकता के आधार पर है। हिंदुत्व के भाव के साथ भारत को जोड़ने का काम होना चाहिए, लेकिन तिरस्कार के आधार पर जोड़ेंगे तो कैसे जुड़ेगा भारत। उन्होंने कांग्रेस के आरएसएस और भाजपा पर नफरत फैलाने के आरोप पर कहा, इनके बाप-दादा ने संघ का तिरस्कार बिना कारण किया, प्रतिबंध लगाए। मगर संघ बढ़ता रहा, क्योंकि संघ के पास सत्य सिद्धांत है। समाज का सहयोग मिलता रहा है। वो कमेंट करने लायक नहीं, छोड़िए।

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