साल में 5 से 10 यूनिट की बढ़ी खपत, अब मुफ्त बिजली के भी पैसे देने की लगेगी चपत - realtimes
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साल में 5 से 10 यूनिट की बढ़ी खपत, अब मुफ्त बिजली के भी पैसे देने की लगेगी चपत

रायपुर। प्रदेश में बीपीएल के 20 लाख से ज्यादा बिजली उपभोक्ता हैं। इनको हर माह सौ यूनिट खपत करने पर 30 यूनिट बिजली मुफ्त मिलती है। साल में इनको 12 सौ यूनिट तक ही खपत करने पर ये छूट मिलती है, अगर खपत 12 सौ यूनिट से पांच या दस यूनिट भी बढ़ गई तो मुफ्त बिजली मिलने की सुविधा छिन जाती है। इसी के साथ सुरक्षा निधि का भी संकट आ जाता है। यही हुआ है इस बार बीपीएल के साढ़े तीन लाख उपभोक्ताओं के साथ। अभी तो पॉवर कंपनी ने इनको सुरक्षा निधि न लेने की राहत दी है, लेकिन बिजली नियामक आयोग का फैसला आने पर इनको सुरक्षा निधि देनी ही पड़ेगी, क्योंकि बिजली एक्ट में हर वर्ग के उपभोक्ताओं से सुरक्षा निधि लेने का प्रावधान है।
प्रदेश में बीपीएल के बिजली उपभोक्ताओं काे राहत देने के लिए प्रदेश सरकार ने इनको जहां मुफ्त कनेक्शन देने का प्रावधान रखा है, वहीं इनसे सुरक्षा निधि नहीं ली जाती है, क्योंकि इनका खर्च राज्य सरकार उठाती है। इसी के साथ इस वर्ग के उपभोक्ताओं को हर माह 30 यूनिट तक बिजली मुफ्त दी जाती है। पहले 40 यूनिट बिजली मुफ्त मिलती थी, लेकिन एलईडी बल्ब आने के बाद इसको कम करके 30 यूनिट किया गया है।
देना पड़ेगा पूरी खपत का बिल
छत्तीसगढ़ राज्य पॉवर कंपनी हर साल अक्टूबर माह में उपभोक्ताओं की औसत खपत देखती है और उसी के हिसाब से सुरक्षा निधि तय करती है। इस बार जब उपभोक्ताओं की औसत खपत देखी गई तो साढ़े तीन लाख बीपीएल वर्ग के उपभोक्ताओं की औसत खपत साल में 12 सौ यूनिट से ज्यादा निकली तो इन उपभोक्ताओं को सामान्य वर्ग में डाल दिया गया। अब इन उपभोक्ताओं को 30 यूनिट बिजली की छूट नहीं मिलेगी। अब इनको पूरी खपत का बिल देना पड़ेगा। ऐसे में इनको 30 यूनिट के लिए करीब सौ रुपए देने पड़ेंगे।
सुरक्षा निधि का भी फटका
बीपीएल के जो उपभोक्ता ज्यादा खपत के कारण सामान्य में आ गए हैं, उनको औसत खपत के हिसाब से अब सुरक्षा निधि भी देनी पड़ेगी। हर माह की जितनी औसत खपत होती है, उसके बिल के हिसाब से सुरक्षा निधि में दो माह के बिल के बराबर राशि देनी पड़ती है। यही वजह है कि इस बार साढ़े तीन लाख उपभोक्ताओं के बिलाें में खपत के हिसाब से एक हजार से दो हजार तक सुरक्षा निधि जुड़ने से हड़कंप मच गया। इसके बाद पॉवर कंपनी ने इस पर फिलहाल रोक लगाते हुए बिजली नियामक आयोग से मार्गदर्शन लेने का फैसला किया है। आयोग से जुड़े अधिकारियों का कहना है, बिजली एक्ट में किसी भी वर्ग के उपभोक्ता को सुरक्षा निधि में छूट का प्रावधान नहीं है।

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