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छत्तीसगढ़ के आदिवासी इलाकों में स्थानीय भाषा में शिक्षा: राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत नई पहल

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत आदिवासी समुदायों में शिक्षा की पहुंच बढ़ाने का महत्वपूर्ण कदम

नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के आदिवासी अंचलों के बच्चों को अब उनकी अपनी स्थानीय बोली और भाषा में शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत, विष्णुदेव सरकार ने यह महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए आदिवासी समुदायों में शिक्षा की गुणवत्ता और पहुंच बढ़ाने की पहल की है। इस योजना के अंतर्गत बच्चों को उनकी मातृभाषा में पढ़ाई करने का मौका मिलेगा, जिससे वे अपनी संस्कृति से जुड़े रहेंगे और शिक्षा की बेहतर समझ विकसित कर सकेंगे।

राज्य स्तरीय शाला प्रवेशोत्सव

शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के अवसर पर, राज्य स्तरीय शाला प्रवेशोत्सव का आयोजन छत्तीसगढ़ के दूरस्थ आदिवासी जिले जशपुर के बगिया गांव में किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य आदिवासी समुदाय के बच्चों को स्कूल में नामांकन के लिए प्रेरित करना और शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर स्थानीय भाषाओं में प्रारंभिक शिक्षा के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि मातृभाषा में शिक्षा से बच्चों की समझ और सीखने की प्रक्रिया में सुधार होगा और यह पहल स्थानीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण में भी मददगार साबित होगी।

स्थानीय भाषाओं में पाठ्यपुस्तकों की तैयारी

स्कूल शिक्षा सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने जानकारी दी कि राज्य में 18 स्थानीय भाषाओं-बोलियों में स्कूली बच्चों की पुस्तकें तैयार की जा रही हैं। पहले चरण में छत्तीसगढ़ी, सरगुजिहा, हल्बी, सादरी, गोंडी और कुडुख में पाठ्यक्रम तैयार किए जाएंगे। इसके लिए प्रदेशभर के साहित्यकारों, लोक कलाकारों और संकलनकर्ताओं की मदद ली जा रही है। साथ ही, वरिष्ठ नागरिकों और शिक्षकों का भी सहयोग लिया जाएगा।

स्थानीय बोली में शिक्षा के लाभ

हाई स्कूल बगिया के प्रधानाचार्य दिनेश शर्मा ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि आदिवासी बच्चों में अपार प्रतिभाएँ होती हैं। स्थानीय बोली में शिक्षा से आदिवासी अंचलों के ज्यादा से ज्यादा बच्चों को आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। इस पहल से न केवल बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ेगी, बल्कि उनकी सांस्कृतिक पहचान भी सशक्त होगी।

प्रमुख घोषणाएं

राज्य स्तरीय शाला प्रवेशोत्सव के दौरान, मुख्यमंत्री ने जशपुर के सरकारी स्कूल के अटल टिंकरिंग लैब में रोबोटिक्स मॉडल विकसित करने वाले छात्रों से बातचीत की और मिट्टी के बर्तन बनाकर प्रीवोकेशनल गतिविधियों में भाग लिया। उन्होंने घोषणा की कि सरकारी स्कूलों में हर साल ग्रीष्मकालीन शिविर आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने बताया कि 10वीं और 12वीं कक्षा के छात्रों के लिए राज्य सरकार इस साल से दो बोर्ड परीक्षाएं आयोजित करेगी। पीएमश्री योजना के तहत, राज्य में प्रथम चरण में 211 स्कूलों को मॉडल स्कूल के रूप में विकसित किया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ में आदिवासी अंचलों में प्रारंभिक शिक्षा के इस प्रयास से बच्चों को उनकी मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा, जिससे वे अपनी संस्कृति से जुड़े रहेंगे और उनकी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा। यह पहल शिक्षा के प्रति बच्चों की रुचि बढ़ाने और उन्हें एक बेहतर भविष्य की ओर अग्रसर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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