जंगल को आग से बचाने के लिए सरकारी अमले के साथ भिड़ गए दो मासूम

जगदलपुर। बस्तर जिले के करपावंड रेंज के अंतर्गत मोखागांव के जंगल में जब शनिवार रात में भीषण आग की लपटें उठीं, तो उन्हें बुझाने के लिए सरकारी अमले के साथ दो ऐसे जांबाज धनपुर गांव के रहने वाले 8 वर्षीय मुना (पिता मंगलू) और 10 वर्षीय तिलक (पिता मीनाधर) ने जंगल को जलता देख न केवल साहस का परिचय दिया, बल्कि अपनी सूझबूझ से वन विभाग के कर्मचारियों को भी हैरत में डाल दिया ।
जैसे ही इन बच्चों ने जंगल में आग की लपटें देखीं, उन्हें अपने भविष्य का आधार जलता हुआ महसूस हुआ। बिना किसी हिचकिचाहट या सरकारी आदेश के इंतजार के, यह दोनों बच्चे स्वप्रेरित होकर आग बुझाने के काम में जुट गए। बच्चों के इस नि:स्वार्थ और साहसिक कदम ने मौके पर मौजूद वन विभाग के कर्मचारियों में भी नए उत्साह का संचार कर दिया।
नन्हे हाथों को आग से लड़ते देख कर्मचारियों का मनोबल इतना बढ़ा कि सभी ने मिलकर बेहद कम समय में आग पर पूरी तरह काबू पा लिया। मासूमों के इस जज्बे ने यह साबित कर दिया कि यदि मन में इच्छाशक्ति हो, तो उम्र कभी बाधा नहीं बनती।
बस्तर के वनमंडलाधिकारी उत्तम कुमार गुप्ता ने रविवार काे बच्चों की जमकर सराहना की है। उन्होंने कहा कि इन बच्चों ने जंगल की रक्षा के प्रति जो समर्पण दिखाया है, वह पूरे समाज के लिए एक प्रेरणा है। विभाग ने इस साहस का सम्मान करने का निर्णय लिया है, और इन बच्चों को जल्द ही औपचारिक रूप से सम्मानित किया जाएगा ।
वन मंडलाधिकारी ने जोर देकर कहा कि इन बच्चों की सोच हमें यह सिखाती है कि जंगल केवल पेड़ों का समूह नहीं, बल्कि हमारा भविष्य हैं। वन विभाग ने आम जनता से भी मार्मिक अपील की है कि वे अपनी प्राकृतिक धरोहर को बचाने के लिए जागरूक बनें ।
विभाग ने चेतावनी दी है कि वनों में आग लगाना भारतीय वन अधिनियम 1927 के तहत एक गंभीर और दण्डनीय अपराध है। अधिकारियों ने बस्तरवासियों से अनुरोध किया है, कि यदि कहीं भी वनों में अग्नि की घटना दिखाई दे, तो तत्काल फायर कंट्रोल रूम के टोल फ्री नंबर 1800 233 7000 पर इसकी सूचना दें, ताकि समय रहते प्रकृति को विनाश से बचाया जा सके।



