खास खबर: धमतरी के रिसोर्ट चिंतन में हाेगा भाजपा के 30 में से 20 जिलाध्यक्षों काे बाहर करने पर मंथन

रायपुर(realtimes) एक विज्ञापन आता है जिसमें कहा जाता है घर के सारे के सारे बल्ब बदल दूंगा, लगता है आज-कल भाजपा इसी विज्ञापन की थीम पर काम कर रही है। प्रदेश भाजपा संगठन में लगातार बदलाव पर काम हो रहा है। अब एक बड़ा बदलाव और हाेने वाला है। प्रदेश भाजपा के इस समय 30 संगठन जिले हैं। इन जिलों में 20 जिलों के अध्यक्षों को बदलने की तैयारी चल रही है। एक संकेत यह भी मिल रहा है कि धमतरी में छह अक्टूबर को होने वाली बड़ी बैठक में जहां मिशन 2023 को लेकर रणनीति बनेगी, वहीं आने वाले समय में क्या-क्या फेरबदल करना है इसको लेकर भी फैसला होगा। इसी चिंतन बैठक में जिलाध्यक्षाें काे बाहर का रास्ता दिखाने पर भी मंथन हाेगा। ।
प्रदेश भाजपा में चल रही बदलाव की बयार में अब जल्द ही जिलाध्यक्षों की बारी वाली है। जाे भी जिलाध्यक्ष अपने को अब तक साबित नहीं कर सके हैं और निष्क्रिय माने जा रहे हैं, उनका बदला जाना तय है। इसी के साथ जिन जिलाध्यक्षों को कार्यकर्ता भी पसंद नहीं कर रहे हैं और जो कार्यकर्ताओं की सुनते ही नहीं हैं, उनकी विदाई भी तय है। डेढ़ दर्जन से ज्यादा जिलाध्यक्षों पर गाज गिरने की संभावना है। इसके लिए तीन स्तर पर सर्वे भी हो चुका है। जहां आरएसएस ने सर्वे करवाया है, वहीं भाजपा के राष्ट्रीय संगठन ने अलग और प्रदेश संगठन ने भी अलग से सर्वे करवाया है।
फोकस मिशन 2023 पर
भाजपा के राष्ट्रीय संगठन का पूरा फोकस इस समय छत्तीसगढ़ में मिशन 2023 को लेकर है। भाजपा का एकमात्र लक्ष्य अगले साल चुनाव में जीत प्राप्त करके सत्ता में वापस आना है। इसके लिए लगातार बदलाव किया जा रहा है। सबसे पहले प्रदेशाध्यक्ष फिर नेता प्रतिपक्ष और इसके बाद प्रदेश प्रभारी डी. पुरंदेश्वरी को बदला गया। नए प्रदेशाध्यक्ष अरूण साल की कार्यकारिणी में बड़ा बदलाव किया गया। दमदारी से 60 प्लस के अनुभवी और दिग्गज नेताओं को भी बाहर का रास्ता दिखाया गया। इसी के साथ भाजयुमो, किसान मोर्चा और अल्पसंख्यक मोर्चा के भी अध्यक्ष बदले गए। अब इनकी कार्यकारिणी में भी बड़ा बदलाव होगा।
आरएसएस ने भी कराया सर्वे
भाजपा से जुड़े लोग बताते हैं, प्रदेश के जिलों में तीन स्तर पर सर्वे कराया गया। जहां राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ (आरएसएस) ने अपने स्तर पर सर्वे करके पता लगाने का काम किया है कि जिलाध्यक्षों का काम काज कैसा है, वहीं भाजपा के राष्ट्रीय संगठन ने भी अपनी तरफ से सर्वे करवाया है। प्रदेश संगठन का भी एक सर्वे हुआ है। अब तीनों सर्वे रिपोर्ट के आधार पर जिलाध्यक्षों का भविष्य तय होगा।



