डेडलाइन डेढ़ माह पहले ही डेड, नहीं बनी भाजपा के एक दर्जन जिलों की नई कार्यकारिणी

रायपुर। प्रदेश भाजपा संगठन की राष्ट्रीय नेताओं के निर्देश की नाफरमानी करने का दौर लगातार जारी है। भाजपा के प्रदेश संगठन में नया अध्यक्ष बनने के बाद बनी नई कार्यकारिणी में भाजयुमो, किसान मोर्चा, पिछड़ा और अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष बदले गए। इसके बाद रायपुर शहर जिलाध्यक्ष के साथ कुल 8 जिलों के अध्यक्ष बदले गए और पांच नए जिलों में भी अध्यक्ष बनाए गए। इन सबकी कार्यकारिणी बनाने के लिए राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिव प्रकाश ने 15 नवंबर तक की डेडलाइन तय की थी, लेकिन डेडलाइन खत्म होने के बाद पिछले माह भाजयुमो और एक जिले शक्ति की कार्यकारिणी का गठन हाे सका है, बाकी अब नहीं बन सकी है, जबकि नया साल भी प्रारंभ हो गया है।भाजपा का पूरा फोकस मिशन-2023 पर है। भाजपा की रणनीति विधानसभा चुनाव में जीत प्राप्त करके फिर से सत्ता में वापसी की है। इसके लिए प्रदेश संगठन में लगातार बदलाव किए गए हैं। प्रदेशाध्यक्ष बदलने के बाद उनकी जो नई कार्यकारिणी बनी है, इसमें भी बड़ा बदलाव किया गया है। 54 सदस्यों की कार्यकारिणी में दो दर्जन नए चेहरे हैं। इसी के साथ कार्यकारिणी से 60 साल से ज्यादा वालों की छुट्टी हो गई है। इसके बाद भाजयुमो की कार्यकारिणी का ऐलान हुआ है। इसमें तो सौ फीसदी नए चेहरों को मौका दिया गया है। इसी के साथ पुरानी कार्यकारिणी में रखे गए ओवरएज को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। ओवरएज को लेकर यही लग रहा था कि इनको बाहर करना आसान नहीं होगा, क्योंकि ये बड़े नेताओं के समर्थक थे, लेकिन इनको बाहर का रास्ता दिखाया गया और इसको लेकर किसी तरह का कोई विवाद भी नहीं हुआ है।
एक जिले की बनी कार्यकारिणी
दीपावली के ठीक पहले रायपुर के साथ जहां 8 पुराने जिलाध्यक्षों को बदला गया, वहीं नए बने पांच जिलों में भी नए अध्यक्ष बनाए गए। इन सबको अपनी नई कार्यकारिणी जल्द से जल्द बनाने कहा गया। इसके बाद जब यहां पर राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिव प्रकाश बैठक लेने आए तो उन्होंने बची सभी नियुक्तियों के लिए 15 नवंबर का समय तय किया, लेकिन यह समय निकलने के डेढ़ माह बाद एक मात्र शक्ति जिले की ही कार्यकारिणी अब तक सामने आई है। रायपुर शहर जिला की भी कार्यकारिणी अब तक नहीं बनी है। इसको लेकर तो स्थिति भी स्पष्ट नहीं है। नए जिलाध्यक्ष तय ही नहीं कर पा रहे हैं कि कार्यकारिणी में बदलाव करना है या पुरानी ही कार्यकारिणी से काम चलाना है।



