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उद्याेगाें काे विद्युत शुल्क का बड़ा झटका, लगेगा हर माह चार लाख तक का फटका

रायपुर(realtimes) काेयला संकट से पहले से जूझ रहे उद्याेगाें काे महंगी बिजली का एक बड़ा झटका लग गया है। वैसे ही इस साल दाे बार पहले ही बिजली की कीमत बढ़ चुकी है, अब विद्युत शुल्क में भी इजाफा कर दिया गया है। छत्तीसगढ़ विद्युत शुल्क अधिनियम में संशोधन के बाद इसका राजपत्र में प्रकाशन हो गया है। अब अक्टूबर से नया शुल्क लागू हो गया है। इसका असर घरेलु उपभोक्ताओं पर तो नाम मात्र का होगा, लेकिन सबसे बड़ा असर स्टील उद्योग पर होगा। यही उद्योग बिजली की सबसे ज्यादा खपत करता है। एक मिनी स्टील प्लांट में हर माह 20 से लेकर 35 लाख यूनिट बिजली की खपत होती है। इसका बिल एक से दो करोड़ रुपए हर माह आता है। पहले इनको विद्युत शुल्क छह फीसदी लगता था अब आठ फीसदी लगेगा। ऐसे में हर माह दो से चार लाख रुपए ज्यादा लगेंगे। रोलिंग मिलों को हर 20 से 30 हजार रुपए का फटका लगेगा। अलग-अलग उद्योगों और मॉल को उनकी खपत के हिसाब से हर माह ज्यादा शुल्क देना पड़ेगा।
प्रदेश में 66 लाख से ज्यादा बिजली उपभोक्ता हैं। सबसे ज्यादा 60 लाख उपभोक्ता घरेलु हैं। इसके बाद कृषि पंपों के पांच लाख से ज्यादा उपभोक्ता हैं। जहां तक बिजली की सबसे ज्यादा खपत का सवाल है तो मिनी स्टील प्लांटों में सबसे ज्यादा रोज पांच से छह सौ मेगावाट की खपत होती है। यही उद्योग हर साल पांच से छह हजार करोड़ की बिजली लेता है। अब जबकि विद्युत शुल्क में इजाफा किया गया तो इसी उद्योग को सबसे बड़ा करंट लगा है।
स्टील प्लांटों को दो से चार लाख लगेंगे ज्यादा
घरेलु उपभोक्ताओं को तो हर माह सौ रुपए से कम का फटका लगेगा, इसी के साथ गैर घरेलु उपभोक्ताओं को भी खपत के हिसाब से दो से तीन सौ रुपए ज्यादा लगेंगे, लेकिन स्टील उद्योग को सबसे ज्यादा फटका लगेगा। एक मिनी स्टील प्लांट में उसके उत्पादन के हिसाब से हर माह 20 से 35 लाख यूनिट बिजली लगती है। इनको करीब छह रुपए प्रति यूनिट के लगते हैं। ऐसे में 20 लाख यूनिट खपत करने वालों का बिल एक करोड़ 20 लाख होता है। इसके शुल्क के रूप में पहले छह फीसदी के हिसाब से सात लाख 20 हजार लगते थे अब इनको आठ फीसदी के हिसाब से 9 लाख 60 हजार लगेंगे। यानी दो लाख 40 हजार ज्यादा लगेंगे। इसी तरह से 35 लाख यूनिट खपत करने वालों का बिल दो करोड़ दस लाख होता है। इनको अब तक 12 लाख 60 हजार लगते हैं। अब 16 लाख 80 हजार लगेंगे। यानी चार लाख बीस हजार ज्यादा लगेंगे।

रोलिंग मिलों काे हर माह 20 हजार का करंट

रोलिंग मील वालों की खपत हर माह करीब एक लाख यूनिट है। इसको अभी 60 हजार रुपए शुल्क लगता है। यह अब 80 हजार रुपए हो जाएगा। स्पंज आयरन में खपत हर माह चार से पांच लाख यूनिट है। इनका बिल हर माह 20 से 25 लाख आता है। इनको अभी एक लाख 20 हजार से डेढ़ लाख रुपए शुल्क लगता है। यह शुल्क 1 लाख 60 हजार से दो लाख हो जाएगा। इसी के साथ शॉपिंग मॉल और अन्य व्यापारिक संस्थानों को उनकी खपत के हिसाब से हर माह 5 से 20 हजार तक ज्यादा लगेंगे।

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