हिंदू राष्ट्र और एक कानून से मुसलमान डरे हुए नहीं हैं, उनकाे भ्रम में डालकर डराने की हाे रही साजिश - realtimes
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हिंदू राष्ट्र और एक कानून से मुसलमान डरे हुए नहीं हैं, उनकाे भ्रम में डालकर डराने की हाे रही साजिश

आरएसएस के डॉ. इंद्रेश कुमार से सीधी बातचीत

रायपुर(realtimes) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ देश भर के मुसलमानाें काे जाेड़ने में लगा है। इसका जिम्मा आरएसएस की राष्ट्रीय कार्यसमिति के सदस्य डॉ. इंद्रेश कुमार काे दिया गया है। वे लगातार देश भर में मुसलमानों से संवाद कर रहे हैं। केंद्र सरकार ने अब एक देश एक कानून बनाने का फैसला किया है। इसकाे लेकर देश भर में रायशुारी का दाैर चल रहा है। इस कानून का विरोध भी किया जा रहा है। इस मामले में डॉ. इंद्रेश कुमार का कहना है, अपने देश का मुसलमान न तो हिंदू राष्ट्र की बात से डरा हुआ है और न ही एक कानून की बात से। मुसलमानों के डरे होने की बात करने वाला विपक्ष है जो भ्रम फैलाने का काम कर रहा है। देश में एक कानून लागू होने से हिंदू-मुसलमान और करीब आएंगे।

सवाल- हिंदू राष्ट्र को लेकर मुसलमानों में डर की बात हो रही है?
जवाब- मुसलमान को हर बात पर डराया जाता है। ईसाई क्यों नहीं डर रहे हैं। बौद्ध क्यों नहीं डर रहे हैं,  जैन क्यों नहीं डर रहे हैं। कोई भी पंथ क्यों नहीं डर रहा है। सच्चाई यह है कि देश का कोई मुसलमान डर हुआ नहीं है। यह सब काम विपक्ष कर रहा है। विपक्ष मुसलमानों को डराने का काम कर रहा है। विपक्ष अपनी राजनीति के लिए मुसलमानों को मोहरा बनाने का काम कर रहा है। भारत का मुसलमान तो यह मानता है कि वह भारत में मुस्लिम राष्ट्रों से ज्यादा सुरक्षित है। मुसलमान ही कहते हैं, यह हिंदू देश है, इसलिए हम सुरक्षित हैं। मुसलमानों को भड़काने और देश का विभाजन करवाने का काम विपक्ष करना चाहता है। 

सवाल- देश में एक कानून का विरोध हो रहा है, ऐसे में क्या यह लागू हो पाएगा?
जवाब- हम एक जन है, एक देश है, एक राष्ट्रगान है, एक झंडा है तो फिर एक कानून में क्या गलत है। वैसे भी हम सब एक कानून से अभी भी चल रहे हैं। भारत विश्व में एकमात्र ऐसा देश है, जहां पर विभिन्न प्रकार के धर्म और उप धर्म हैं। यह एकमात्र देश ऐसा है, जो हिंदू बहुल है। इसके बाद भी यहां पर हर धर्म का सम्मान होता है। जो भी एक कानून का विरोध कर रहे हैं, वो अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने के कारण ऐसा कर रहे हैं। इस कानून से किसी का नुकसान होने वाला नहीं है। यूसीसी का मतलब है देश को दंगा मुक्त करना है। यूसीसी हर किसी के सम्मान की गारंटी बनेगी। ऐसा होने से देश दंगा मुक्त अपने आप हो जाएगा। किसी के तीज त्योहार पर पत्थर नहीं फेंके जाएंगे। किसी के पूजा स्थल को तोड़ा नहीं जाएगा। इस कानून के बाद धर्मांतरण नहीं होगा, लव जिहाद नहीं होगा।
सवाल-मुस्लिम लॉ के प्रभावित होने और मुस्लिम समुदाय के एक से ज्यादा निकाह पर रोक की बात हो रही है?
जवाब- देश में मुस्लिम लॉ, जैन लॉ, ईसाई लॉ की जरूरत ही नहीं है, जब एक कानून होगा तो। जहां तक बात एक से ज्यादा निकाह की बात है तो इसके अपने कायदे हैं। एक से ज्यादा निकाह का मतलब यह नहीं है कि कोई भी कभी भी ऐसा कर सकता है। इसके पीछे क्या है, उसको जान लें। अगर किसी के घर के आस-पास या जान पहचान में कोई ऐसी महिला है तो अपना पालन पोषण नहीं कर सकती है और बेसहारा असहाय है, तो ऐसी महिला से कोई भी मुस्लिम अपनी पत्नी की सहमति से निकाह कर सकता है। वैसे भी एक से ज्यादा निकाह एक तरह से कुरीति है। यह उसी तरह की कुरीति है जैसी तीन तलाक की कुरीति है। इसीलिए सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रथा को समाप्त करने का काम किया है।

सवाल- जिस तरह से शहरों और प्रतीकों के नाम बदले जा रहे हैं, उसके बारे में क्या सोचते हैं?
जवाब- यह बात गलत है कि प्रतीकों के नाम बदले जा रहे हैं। सच्चाई यह कि जिनके नाम बदले गए थे, उनके नाम वापस रखे जा रहे हैं। प्रयाग राज का नाम इलाहाबाद कर दिया गया था, उसे प्रयाग राज किया गया है। प्रयाग राज नाम ऐतिहासिक है। इसी तरह से अयोध्या का नाम फैजाबाद कर दिया गया था। फैजाबाद को कौन जानता है, अयोध्या काे पूरी दुनिया जानती है। क्या मक्का शरीफ का नाम बदलना चाहिए।
सवाल-मदरसों में कट्टरपंथ और आतंकवाद की शिक्षा देने का आरोप लगता है?
जवाब- ये आरोप भी राजनीति करने वालों की तरफ से लगते हैं। कहीं भी मदरसों में यह नहीं होता है। वहां पर शिक्षा दी जाती है। इस तरह की बातें करके हिंदू और मुसलमानों के बीच मतभेद पैदा करने का काम किया जा रहा है।
सवाल- छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार हिंदू मान्य परंपराओं पर काम कर रही है, इसके बारे में क्या सोचते हैं?
जवाब- सवाल यह है कि इसके पीछे उनका ईमान है या राजनीति है। सच्चाई यह है कि इसके पीछे राजनीति के अलावा कुछ नहीं है। दिखावे में करने और ईमान से करने में फर्क है। देश के नेता जो भी काम करे ईमान से करे दिखावे के लिए न करे। छत्तीसगढ़ में आदिवासियों का धर्मांतरण हो रहा है। आदिवासी अपने धर्म से अलग हो रहे हैं, इसको रोकने का काम क्यों नहीं हो रहा है। इसको संरक्षण दिया जा रहा है तो फिर कौन सी हिंदू मान्य परंपराओं पर आप काम कर रहे हैं। किसी को किसी के धर्म से अलग करना हिंदू मान्य परंपरा पर काम करना है क्या?
सवाल- मणिपुर से छत्तीसगढ़ की घटना को जोड़ना क्या सही है?
जवाब- घटना कहीं की भी किसी भी हाल में देश में महिलाओं का शोषण नहीं होना चाहिए। इसको रोकना सबकी जिम्मेदारी है।

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