12 घंटे पुलिस हिरासत के बाद रो पड़े विधायक हुमायूं कबीर - realtimes
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12 घंटे पुलिस हिरासत के बाद रो पड़े विधायक हुमायूं कबीर

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में बुधवार को उस समय बड़ा भूचाल आ गया जब नौदा सीट से विधायक हुमायूं कबीर ने राजनीति से संन्यास लेने के संकेत दे दिए। मंगलवार को रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव के दौरान पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने और 12 घंटे बाद छोड़े जाने के घटनाक्रम से दुखी होकर कबीर मीडिया के सामने भावुक होकर रो पड़े। उन्होंने ऐलान किया है कि जब तक मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी पद पर रहेंगे, वे विधानसभा नहीं जाएंगे। इस दौरान उन्होंने अपने इस फैसले के लिए नौदा की जनता से माफी भी मांगी।

12 घंटे की कस्टडी के बाद हुआ मोहभंग

रेजीनगर में मंगलवार को मतदान के दौरान पुलिस ने हुमायूं कबीर को हिरासत में ले लिया था। करीब 12 घंटे बाद रिहा होने पर कबीर ने मीडिया से बात करते हुए पुलिस और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि रेजीनगर सीट पर चुनाव निष्पक्ष नहीं हुआ है और इसके लिए सीधे तौर पर प्रशासनिक व्यवस्था जिम्मेदार है। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा परिस्थितियों में मुर्शिदाबाद जिले की मुस्लिम बहुल सीट पर बीजेपी की जीत होगी।

जनता से लेंगे राय, 60% सहमति पर देंगे इस्तीफा

राजनीतिक व्यवस्था और अपने साथ हुए व्यवहार से निराश हुमायूं कबीर ने अपनी विधानसभा क्षेत्र की जनता से अंतिम राय लेने का फैसला किया है। उन्होंने घोषणा की है कि वे क्षेत्र के लोगों की बैठक बुलाएंगे। यदि 60 प्रतिशत लोग पद छोड़ने के पक्ष में सहमति जताते हैं, तो वे तुरंत विधायक पद से अपना इस्तीफा सौंप देंगे।

बाबरी मस्जिद की नींव रखने पर रहे थे चर्चा में

हुमायूं कबीर का विवादों से पुराना नाता रहा है। इससे पहले वे तृणमूल कांग्रेस (TMC) के टिकट पर विधायक चुने गए थे। टीएमसी में रहते हुए जब उन्होंने बंगाल में बाबरी मस्जिद बनाने का ऐलान किया, तो पार्टी ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया था। इसके बाद उन्होंने टीएमसी छोड़कर अपनी नई पार्टी ‘उन्नयन पार्टी’ का गठन किया और विधानसभा चुनाव लड़ा।

दोनों सीटों पर दर्ज की थी जीत

उन्नयन पार्टी के बैनर तले चुनाव लड़ते हुए हुमायूं कबीर ने नौदा और रेजीनगर दोनों सीटों पर जीत हासिल की थी। नियम के मुताबिक उन्होंने बाद में रेजीनगर सीट छोड़ दी थी, जिस पर हाल ही में उपचुनाव कराया गया है। अब उपचुनाव के दौरान घटे घटनाक्रम और कबीर के इस्तीफे वाले बयान के बाद पश्चिम बंगाल का राजनीतिक पारा पूरी तरह गरमा गया है।

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