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इंदिरा गांधी की रणनीति ने पाकिस्तान को दो टुकड़ों में कर दिया
भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की रणनीति ने पाकिस्तान को चारों खाने चित्त कर दिया और पाकिस्तान दो टुकड़ों में कर दिया। 1971 की जंग के आगाज से पहले ही प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी कई पहलुओं पर रणनीति बना चुकी थीं। उन्होंने अपने सैन्य जनरलों को पूरी छूट दी कि वह मुक्ति वाहिनी को अपने तरीके से तैयार करें और साथ ही खुद भी आने वाले कूटनीतिक संकट के लिए तैयार थीं।
इंदिरा गांधी का 1971 युद्ध के लिए सोच एकदम साफ थी कि यह छोटा और निर्याणक हो। युद्ध लंबा खिंचने से इसमें अमेरिका और चीन जैसे देशों की दखलंदाजी का अंदेशा था। इंदिरा गांधी ने पूर्वी पाकिस्तान का संकट शुरू होने से लेकर युद्ध तक अपना धैर्य बनाए रखा। शरणार्थियों की संख्या बढ़ रही थी, कलकत्ता से पूर्वी पाकिस्तान की निर्वासित सरकार चल रही थी और भारत में विपक्ष इस सरकार को आधिकारिक पहचान देने की मांग कर रहा था। लेकिन इंदिरा गांधी ने धैर्य बनाए रखा।
पाकिस्तान की एयरफोर्स के हमले के दौरान इंदिरा कलकत्ता में थीं। वह तुरंत दिल्ली पहुंचीं और देश को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि हम पर एक युद्ध थोपा गया है। इन शब्दों से हमें इंदिरा की कूटनीति की एक झलक मिलती है।
इंदिरा गांधी की रणनीति थी कि युद्ध छोटा हो लेकिन लंबा खिंचता है तो दुनिया को पहले से ही पाकिस्तान की करतूत पता होनी चाहिए। ऐसे में इंदिरा गांधी ने मार्च से अक्टूबर 1971 तक दुनिया के कई नेताओं को खत लिखकर भारत की सीमा पर चल रहे हालात की जानकारी दी। गांधी ने 21 दिन का जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन, बेल्जियम और अमेरिका का दौरा भी किया था। हर जगह इंदिरा ने पूर्वी पाकिस्तान में चल रहे नरसंहार का जिक्र किया।



