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रियल टाइम्स ख़ास ख़बर: भाजपा काे छत्तीसगढ़ की सत्ता में वापस लाने RSS की तिकड़ी

रायपुर(realtimes) प्रदेश में 15 साल तक सत्ता में रहने के बाद पिछले विधानसभा चुनाव में महज 15 सीटें पर सिमटने वाली भाजपा काे कांग्रेस सरकार के करीब चार सालाें के शासन में भाजपा के दिग्गज नेता इस स्थिति तक नहीं ला सके हैं कि अगले साल हाेने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा की सत्ता में वापसी हाे सके। यही वजह है कि अब भाजपा ने राज्य ने दिग्गज नेताओं काे किनारे करते हुए आरएसएस के नेताओं पर भराेसा जताया है। भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व ने प्रदेश में भाजपा काे सत्ता में लाने की जिम्मेदारी आरएसएस की तिकड़ी राष्ट्रीय सगसंगठन महामंत्री शिवप्रकाश, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल के साथ भाजपा के नए प्रदेशाध्यक्ष बिलासपुर के सांसद अरूण साव काे साैंपी है। इनके भराेसा भाजपा अपनी नैया पार लगाना चाहती है। यही नहीं भाजपा राज्य के उन दिग्गज नेताओं काे भी किनारे लगाएगी जिनके कारण कार्यकर्ता लंबे समय से नाराज हैं।

भाजपा ने एक साल पहले यहां पर राष्ट्रीय सहसंगठन महामंत्री साैदान सिंह के स्थान पर कमान आरएसएस के शिवप्रकाश काे साैंपी। इसके के साथ प्रदेश का प्रभारी डा. अनिल जैन के स्थान पर डी. पुरंदेश्नवरी काे बनाया। यही नहीं एक सहप्रभारी नितिन नवीन काे बनाया गया। लेकिन एक साल में कुछ ज्यादा नहीं हाे सका। इसके पीछे का कारण यह रहा है कि यहां पर 15 साल तक सत्ता में रहने वाले दिग्गज हावी हैं। यह बात प्रदेश प्रभारी काे भी समझ में आ गई। ऐसे में राष्ट्रीय संगठन तक जब यह बात पहुंची ताे उसने यहां पर क्षेत्रीय संगठन महामंत्री की नियुक्ति करने का फैसला किया। इसके लिए आरएसएस के अजय जामवाल का नाम तय किया गया। उनकी नियुक्ति काफी पहले हाे जाती, लेकिन राष्ट्रपति चुनाव के कारण मामला थाेड़ा लटक गया। श्री जामवाल की नियुक्ति के बाद पहले से तय रणनीति के मुताबिक प्रदेशाध्यक्ष काे भी बदल दिया गया। इसका जिम्मा भी आरएसएस की पृष्ठभूमि वाले अरूण साव काे साैंपा गया। ऐसे में अब आरएसएस के तीन दिग्गज नेताओं के हाथ में भाजपा की कमान आ गई है।

कुछ नेताओं की हाेगी विदाई

प्रदेशाध्यक्ष काे बदले जाने के बाद अब प्रदेश के कुछ नेताओं की विदाई भी तय है। पहले कदम पर नेता प्रतिपक्ष धरमलाल काैशिक काे एक दिन बाद बदल दिया जाएगा। इसके बाद कुछ ऐसे नेताओं का भी नंबर है जिनके बारे में राष्ट्रीय संगठन जानता है कि इनके यहां रहते हुए परेशानी हाेगी और भाजपा काे सत्ता में वापस लाना मुश्किल हाेगा। इन नेताओं के चेहरे की रंगत भी नए प्रदेशाध्यक्ष के पहले रायपुर आगमन के समय भी देखने काे मिली। ये नेता किसी भी तरह से खुश नजर नहीं आ रहे थे, क्याेंकि इनकाे मालूम है कि अब उनकी यहां से विदाई तय हाे गई है।

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