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जानिए, कौन हैं सऊदी अरब की ये महिला, जिनकी तारीफ करते नहीं थक रहे भारतीय

सऊदी में योग को पहचान दिलाने के लिए उन्हें 2018 में भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से भारत का चौथा सबसे सर्वोच्च सम्मान पद्मश्री भी मिल चुका है. नौफ के लिए अरब में योग को कानूनी मान्यता दिलाना काफी मुश्किल था. यहां तक कि इसके लिए उन्हें सऊदी अरब के कट्टरपंथियों के विरोध का भी सामना करना पड़ा. नौफ ने ऐसी तमाम चुनौतियों का सामना करते हुए योग को सऊदी अरब के घर-घर तक पहुंचाने में सफलता पाई.

लोगों ने सोशल मीडिया पर नौफ को रक्षाबंधन की ढेर सारी शुभकामनाएं दीं और उन्होंने सभी को जवाब भी दिया. एक भारतीय यूजर ने लिखा, “नौफ की जिंदगी और उनका योगिनी बनना बहुत ही प्रेरणादायक है, ये एक चमत्कार है.” दूसरे भारतीय यूजर ने ट्वीट किया, अरब दुनिया और भारत के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान लंबे समय से चला आ रहा है और नौफ मरवाई इस विरासत को सफलतापूर्वक आगे ले जा रही हैं. भारत से उन्हें शुभकामनाएं.

यूएई के स्थानीय निवासी और सोशल मीडिया पर सक्रिय हसन सजवानी ने ट्वीट कर कहा, भारत के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से पद्म श्री सम्मान पा चुकीं सऊदी महिला नौफ मरवाई से मिलिए. नौफ सऊदी अऱब की पहली प्रमाणित योग इंस्ट्रक्टर हैं. उन्होंने सऊदी अरब में योग को कानूनी मान्यता दिलाने में अहम भूमिका निभाई है. 

सऊदी अरब में भारत के राजदूत रह चुके नवदीप सूरी ने नौफ की तारीफ में कहा कि मुझे 2019 में अबू धाबी में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर नौफ मरवाई से मिलने का मौका मिला था. वह युवाओं के लिए प्रेरणा हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक, दो दशक पहले तक नौफ सऊदी अरब की एकमात्र योग शिक्षिका थीं. उन्होंने 2004 में पहली बार योग को लेकर सार्वजनिक रूप से बात की थी. हजारों लोगों और कई योग शिक्षिकाओं को प्रशिक्षित भी किया. नौफ ने 2006 में योग को कानूनी मान्यता देने के लिए प्रशासन से संपर्क किया था लेकिन इसका कोई ज्यादा फायदा नहीं हुआ. 

उनका कहना है कि 2015 में बदलाव आना शुरू हुआ. हालांकि, उस समय कुछ चरमपंथी महिलाओं के खेलने और योग करने के खिलाफ थे. यह वही समय था, जब संयुक्त राष्ट्र ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया था.

इतना ही नहीं, नौफ भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से काफी प्रभावित हैं. वह कहती हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शख्सियत औऱ उनकी विदेश नीति बहुत ही प्रभावी है. योग दिवस को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए उनके अथक प्रयासों की वजह से मैं उनके बारे में जान पाई. मैं हैरान हूं कि सऊदी अरब में कई योगी और लोग उन्हें जानते हैं और उनके काम से वाकिफ हैं. 

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