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टीएमसी नेता अनुब्रत मंडल को CBI ने किया गिरफ्तार, पशु तस्करी मामले में लिया ऐक्शन

पशु तस्करी केस में सीबीआई ने बड़ा ऐक्शन लेते हुए टीएमसी के नेता अनुब्रत मंडल को गिरफ्तार कर लिया है।आज सुबह सीबीआई की टीम अनुब्रत मंडल के घर पर पहुंची थी। अनुब्रत मंडल बीरभूम जिले के टीएमसी अध्यक्ष हैं। ऐसे में उनकी गिरफ्तारी ममता बनर्जी के लिए बड़ा झटका है, जो पहले ही मंत्री रहे पार्थ चटर्जी की गिरफ्तारी से बैकफुट पर हैं। शिक्षक भर्ती घोटाले में फंसे पार्थ चटर्जी की सहयोगी अर्पिता मुखर्जी के घर से 50 करोड़ रुपये की नकदी बरामद हुई थी।

अनुब्रत मंडल ने सीबीआई की ओर से इस केस में भेजे गए 10 समन पर कोई जवाब नहीं दिया था। इसके बाद एजेंसी ने अदालत का रुख किया था। इससे पहले दो बार सीबीआई उनसे पूछताछ कर चुकी है। सीबीआई ने 2020 में पशु तस्करी के मामले में केस दर्ज किया था, जिसमें अनुब्रत मंडल का नाम भी सामने आया था। सीबीआई के मुताबिक 2015 से 2017 के दौरान बीएसएफ ने 20,000 पशुओं के सिर बरामद किए थे। इन पशुओं की सीमा पार तस्करी की जा रही थी। सीबीआई ने हाल ही में इसी केस में कई जगहों पर छापेमारी की थी। एजेंसी ने मंडल के बॉडीगार्ड सैगल हुसैन को पहले ही गिरफ्तार कर लिया था।

काफिले के साथ पहुंची सीबीआई, घेर लिया गया अनुब्रत का घर

जानकारी के मुताबिक अनुब्रत मंडल के घर पर सीबीआई अधिकारी राजीव मिश्रा के नेतृत्व में एक टीम 5 से 6 गाड़ियों के काफिले के साथ पहुंची थी। इस दौरान अनुब्रत के घर के बाहर केंद्रीय सुरक्षा बलों की मौजूदगी थी। एजेंसी ने घर पर ही अनुब्रत मंडल से कुछ देर पूछताछ की और फिर गिरफ्तार कर लिया। अनुब्रत मंडल के घर पर सीबीआई की छापेमारी और घर के सामने अतिरिक्त केंद्रीय बलों की तैनाती की खबर पर बड़ी संख्या में लोग उमड़ पड़े। सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय अधिकारी आज सुबह बोलपुर के बैंक कर्मचारियों से गौ तस्करी मामले की जांच में पूछताछ भी करेंगे।

ममता बनर्जी के लिए बढ़ी मुश्किल, लगातार दो झटके

सूत्रों के मुताबिक, एक बैंक कर्मचारी को पहले ही तलब किया जा चुका है। सीबीआई के अधिकारी बैंक कर्मचारियों से पूछताछ करना चाहते हैं कि गौ तस्करी मामले में कितनी रकम किस खाते में कहां से जमा की गई। पशु तस्करी केस में अनुब्रत की गिरफ्तारी से ममता बनर्जी को कुछ ही दिनों में दूसरा झटका लगा है। वह पहले ही पार्थ चटर्जी की गिरफ्तारी और बड़े पैमाने पर कैश बरामद होने से दबाव में थीं। उन्होंने खुद कड़ा ऐक्शन लेते हुए पार्थ को मंत्री पद से हटाया था और पार्टी से भी बाहर कर दिया था।

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