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सोनोग्राफी सेंटर के खिलाफ बड़ी कार्रवाई

2 सोनोग्राफी सेंटरों को किया सील
8 सोनोग्राफी सेंटरों पर नहीं हो रहा था एक्ट का पालन पंजीयन किया निरस्त
12 सेंटरों को दिया गया कारण बताओ नोटिस

रायपुर(realtimes) पीसीपीएनडीटी एक्ट (PCPNDT Act)(गर्भाधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (PCPNDT) अधिनियम के तहत गठित जिला सलाहकार समिति की बैठक का आयोजन पूनम शर्मा डिप्टी कलेक्टर जिला रायपुर की अध्यक्षता में किया गया। बैठक में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ मीरा बघेल, पीसीपीएनडीटी की नोडल अधिकारी डॉ. स्मृति देवांगन मौजूद रही।

बैठक की जानकारी देते हुए पीसीपीएनडीटी की नोडल अधिकारी डॉ.स्मृति देवांगन ने बताया पीसीपीएनडीटी एक्ट के परिपालन को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने ज़िले में संचालित सोनोग्राफी सेंटरों  का  टीम के साथ आकस्मिक निरीक्षण किया । सेंटरों में निरीक्षण के बाद  पाया गया की पीसीपीएनडीटी एक्ट (गर्भाधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (PCPNDT) अधिनियम का पालन नही किया जा रहा है । जिसके लियें जिला सलाहकार समिति की बैठक  आयोजित की गई  बैठक में 2 सोनोग्राफी संस्थाओं को बंद  करने का निर्णय लिया गया । 8 सोनोग्राफी संस्थाओं द्वारा एक्ट का पालन नहीं किया जा रहा था उन संस्थाओं के पंजीयन  को निरस्तीकरण करने का लिया गया है । डॉ देवांगन ने कहा स्वास्थ्य विभाग  ने  बीते 2 माह में 22 सोनोग्राफी सेंटरों का आकस्मिक निरीक्षण किया 12 सोनोग्राफी सेंटरों में एक्ट के पालन में खामियां पाई है उन सेंटरों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किए जाने का निर्णय बैठक में लिया है ।

बैठक में डॉ. कल्पना सुखदेव स्त्री रोग विशेषज्ञ, डॉ. एसके सिन्हा शिशु रोग विशेषज्ञ, डॉ. एमपी महेश्वर भेषज रोग विशेषज्ञ, लोक अभियोजक केके शुक्ला, जिला जनसंपर्क अधिकारी पंकज गुप्ता, सामाजिक कार्यकर्ता रूपा श्रीवास्तव, मनीषा शर्मा,सुधा शुक्ला उपस्थित रही ।

क्या है पीसीपीएनडीटी एक्ट                                

गर्भाधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (PCPNDT) अधिनियम, 1994 भारत में कन्या भ्रूण हत्या और गिरते लिंगानुपात को रोकने के लिए भारत की संसद द्वारा पारित एक संघीय कानून है। इस अधिनियम से प्रसव पूर्व लिंग निर्धारण पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। प्री-नेटल डायग्नोस्टिक टेक्निक ‘पीएनडीटी’ एक्ट 1996, के तहत जन्म से पूर्व शिशु के लिंग की जांच पर पाबंदी है। ऐसे में अल्ट्रासाउंड या अल्ट्रासोनोग्राफी कराने वाले जोड़े या करने वाले डाक्टर, लैब कर्मी को तीन से पांच साल सजा और 10 से 50 हजार जुर्माने की सजा का प्रावधान है।

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