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अशोक स्तम्भ के जिस रूप-रेखा पर मचा है बवाल, क्या उसमें सरकार कर सकती है बदलाव, जानें क्या कहता है कानून?

शिल्पकार सुनील देवरे की क्या राय है?

नई संसद की छत पर लगे अशोक स्तंभ को 9,500 किलो तांबा से डिजाइन करने वाले कलाकार सुनील देवरे कहते हैं कि “इसे अधिकतम अशोक स्तंभ पर अंकित कृति जैसा ही रखा गया है। यह 99 प्रतिशत मूल कृति की तरह ही है। प्रतिकृति में बने शेरों को देखने के एंगल के कारण विवाद हो रहा है।“ यानी एक तरह से माना जाए कि एक प्रतिशत की त्रुटि तो है ही।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सुनील देवरे ने कहा कि प्रतिकृति का आकार बड़ा होने के कारण इससे जुड़ी छोटी-छोटी चीजों की तरफ भी लोगों का ध्यान जा रहा है। वैसे उन्होंने माना कि मूल कृति में कुछ क्षति होने के कारण छोटे बदलाव हो सकते हैं, लेकिन हमने प्रतिकृति को अधिकतम मूल कृति के जैसा ही तैयार किया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक शेरों की मुद्रा पर विवाद को लेकर देवरे ने कहा कि जो फोटो इंटरनेट मीडिया पर वायरल है, वह जूम से बाहर है। फोटो नीचे से खींचने के एंगिल के कारण शेरों की मुद्रा में बदलाव दिख रहा है। उन्होंने कहा कि, “प्रतिकृति तैयार करने से पहले हमने संग्रहालय जाकर इस पर शोध किया। हमने केवल ढाई फीट की मूल कृति के आकार को बड़ा किया है। जब आप ऐसा करते हैं तो मूल कृति के सभी डिटेल विशालता के कारण साफ दिखते हैं।“

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