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एक दिन में कांग्रेस को लगे 3 झटके

नयी दिल्ली,(एजेंसी)

सुप्रीम कोर्ट ने क्रिकेटर से नेता बने नवजोत सिंह सिद्धू को 1988 के ‘रोड रेज’ मामले में बृहस्पतिवार को एक साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस एसके कौल की पीठ ने सिद्धू को दी गई सजा के मुद्दे पर पीड़ित परिवार की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई की। हालांकि शीर्ष अदालत ने मई 2018 में सिद्धू को 65 वर्षीय व्यक्ति को ‘जानबूझकर चोट पहुंचाने’ के अपराध का दोषी ठहराया था, लेकिन 1,000 रुपये का जुर्माना लगाकर छोड़ दिया था। अब पीठ ने फैसले में कहा, ‘…हमें लगता है कि रिकॉर्ड में त्रुटि स्पष्ट है…. इसलिए हमने सजा के मुद्दे पर पुनर्विचार आवेदन स्वीकार किया है। लगाए गए जुर्माने के अलावा, हम एक साल के कारावास की सजा देना उचित समझते हैं।’

सितंबर 2018 में शीर्ष अदालत मृतक के परिवार द्वारा दायर की गई पुनर्विचार याचिका पर गौर करने पर सहमत हो गई थी। शीर्ष अदालत ने पूर्व में सिद्धू से उस अर्जी पर जवाब मांगा था जिसमें कहा गया था कि मामले में उनकी दोषसिद्धि केवल जानबूझकर चोट पहुंचाने के छोटे अपराध के लिए ही नहीं होनी चाहिए थी। सिद्धू की ओर दाखिल जवाब में कहा गया था कि शीर्ष अदालत ने मेडिकल साक्ष्य सहित रिकॉर्ड में मौजूद सभी सबूतों का अध्ययन किया, ताकि यह निष्कर्ष निकाला जा सके कि गुरनाम सिंह की मौत के कारण का पता नहीं लगाया जा सका। सिद्धू ने कहा था कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि ‘मौत प्रतिवादी के एक ही आघात से हुई थी (यह मानते हुए कि घटना हुई थी) और इस अदालत ने सही निष्कर्ष निकाला कि यह भादंसं की धारा 323 के तहत आएगा।’ भारतीय दंड संहिता की धारा 323 (जानबूझकर चोट पहुंचाने) में अधिकतम एक वर्ष तक की कैद या 1,000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों सजाएं हो सकती हैं। शीर्ष अदालत ने 15 मई 2018 को सिद्धू को गैर इरादतन हत्या का दोषी ठहराने तथा मामले में तीन साल कैद की सजा सुनाने के पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश को खारिज कर दिया था लेकिन इसने उन्हें एक वरिष्ठ नागरिक को चोट पहुंचाने का दोषी ठहराया था। शीर्ष अदालत ने सिद्धू के सहयोगी रूपिंदर सिंह संधू को भी सभी आरोपों से यह कहते हुए बरी कर दिया था कि दिसंबर 1988 में अपराध के समय सिद्धू के साथ उनकी उपस्थिति के बारे में कोई भरोसेमंद सबूत नहीं है। बाद में सितंबर 2018 में शीर्ष अदालत मृतक के परिवार के सदस्यों द्वारा दायर पुनर्विचार याचिका पर गौर करने के लिए सहमत हुई थी।

कानून का सम्मान करूंगा : सिद्धू

चंडीगढ़ : सजा सुनाए जाने के बाद कांग्रेस की पंजाब इकाई के पूर्व प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू ने ट्वीट किया, ‘कानून का सम्मान करूंगा…।’ सिद्धू पटियाला में महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल थे। उन्होंने आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों के खिलाफ प्रतीकात्मक विरोध दर्ज कराने के लिए पटियाला में हाथी की सवारी की। उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा, ‘महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन। महंगाई से किसानों, मजदूरों, मध्यम वर्ग के परिवारों के बजट पर असर पड़ा है। भोजन, आवास, परिवहन और स्वास्थ्य देखभाल की लागत में 50 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है…।’

यह है मामला

अभियोजन पक्ष के अनुसार, सिद्धू और संधू 27 दिसंबर, 1988 को पटियाला में शेरांवाला गेट क्रॉसिंग के पास एक सड़क के बीच में खड़ी एक जिप्सी में थे। उस समय गुरनाम सिंह और दो अन्य लोग पैसे निकालने के लिए बैंक जा रहे थे। जब वे चौराहे पर पहुंचे तो मारुति कार चला रहे गुरनाम सिंह ने जिप्सी को सड़क के बीच में पाया और उसमें सवार सिद्धू तथा संधू को इसे हटाने के लिए कहा। इससे दोनों पक्षों में बहस हो गई और बात हाथापाई तक पहुंच गई। हाथापाई में घायल गुरनाम सिंह को अस्पताल ले जाया गया जहां उनकी मौत हो गई। सितंबर 1999 में निचली अदालत ने सिद्धू को हत्या के आरोपों से बरी कर दिया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने फैसले को उलट दिया और दिसंबर 2006 में सिद्धू तथा संधू को गैर इरादतन हत्या का दोषी ठहराया। इसने उन्हें तीन साल के कारावास की सजा सुनाई थी और उन पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया था।

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