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‘शिक्षा नीति में समाहित हों महात्मा बुद्ध के विचार’

नयी दिल्ली, 15 मई

भारतीय बौद्ध संघ की ओर से गौतम बुद्ध की 2584वीं जयंती के उपलक्ष्य में रविवार को यहां बुद्ध पूर्णिमा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुभाष सरकार इसमें मुख्य अतिथि थे। उन्होंने कहा कि बुद्ध का शांति, मानवता और समानता का संदेश आज भी प्रासंगिक है। जीवन की पूर्णता के लिए आचरण में बुद्ध के विचारों और मूल्यों को अपनाए जाने की आवश्यकता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता भारतीय बौद्ध संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष भंते संघप्रिय राहुल ने की। उन्होंने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी ने इस मौके पर संदेश भेजा है और कहा है कि भगवान बुद्ध का जीवन मानवता के लिए एक वरदान है। ‘अप्प दीपो भव’ के रूप में उन्होंने जीवन में उन्नति का मूल मंत्र दिया है। राहुल ने पाकिस्तान के मंदिरों में बौद्ध मूर्तियों को तोड़ने की निंदा की।

केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के राज्यमंत्री जॉन बारला ने कहा कि भगवान बुद्ध के विचारों के कारण आज विश्व में भारत और भारतीयों को सम्मान मिल रहा है। उन्होंने शिक्षा नीति में बुद्ध के विचारों को समाहित करने की बात कही।

बारला ने कहा कि उनका मंत्रालय जरूरतमंद लोगों के लिए योजनाएं बनाता है। बौद्ध धर्म को मानने वालों की सहायता के लिए कैसी योजनाएं बनाई जाएं, इस बारे में भंते संघप्रिय राहुल से विचार-विमर्श किया जाएगा। पूर्व सांसद अनीता आर्य ने कहा कि डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने बौद्ध धर्म को अपनाया, ताकि समाज की रक्षा हो सके। विश्व हिंदू परिषद के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष कपिल खन्ना ने कहा कि विश्व के सामने आज जो भी समस्याएं है, उनका समाधान भगवान बुद्ध के संदेश में है।

भाजपा के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने कहा कि आज कई देश बुद्ध के विचारों और सिद्धांतों पर चलते हुए प्रगति कर रहे हैं।

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