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सिलगेर आंदोलन का एक साल पूरा, राज्य सरकार आंदोलनकारियों से चर्चा कर समाधन निकले- सौरा यादव

रायपुर(realtimes) भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी लेनिनवादी) रेड स्टार के राज्य सचिव कॉमरेड सौरा यादव ने कहा है कि आदिवासियों पर दमन तेजी से बढ़ा है, हाल ही में मध्यप्रदेश के सिवनी में दो आदिवासियों की पीट पीट कर हत्या कर दिया गया,पूरे देश भर में निर्दोष आदिवासियों पर तेजी से दमन बढ़ गया है।

छत्तीसगढ़ की कांग्रेस की भूपेश बघेल सरकार आदिवासियों का हितैषी होने का ढोल पिटना बंद करे,इन तीन साल में आपकी सरकार ने आदिवासियों की मूलभूत आवश्यकताओं को भी पूरा नहीं कर पाया है, अब कहा जा रहा है कि चिराग परियोजना से आदिवासियों की जिंदगी में उजाला लाएंगे,आदिवासियों ने 15 साल तक जनता को धोखा देने वाली फासिस्ट भाजपा सरकार की दमननीति से परेशान होकर कांग्रेस सरकार को सत्ता में लाई थी,लेकिन आज भूपेश बघेल की सरकार भी आदिवासियों के साथ विश्वासघात कर रही है,बस्तर संभाग में मूलवासी बचाओ मंच के नेतृत्व में आदिवासियों का आंदोलन आज पूरे एक वर्ष हो गया है,17 मई को सेलेगार में विशाल रैली एवं जनसभा रखा गया है, आंदोलन अब भी निरंतर जारी है। आजादी के 75 साल बाद भी आदिवासी जनता मूलभूत अधिकार शिक्षा,स्वस्थ्य, रोजगार,सड़क, बिजली,पीने का शुद्धपानी से वंचित है,निर्दोष आदिवासियों को माओवादी बता कर जेलो में डालना,जगह जगह पर CRPF ,पुलिस कैम्प बनाना,महिलाओं एवं बालिकाओं के साथ बलात्कार,हत्या, प्रताड़न निरंतर जारी है।

आदिवासीयो का जल,जंगल,जमीन को बचाने एवं मूलभूत अधिकारों की मांग को लेकर लड़ाई निरन्तर जारी है, वर्तमान की कांग्रेस सरकार पूर्व की कॉरपोरेट परस्त फासिस्ट बीजेपी सरकार के नक्शे कदम पर चलते हुए,पांचवी अनुसूची क्षेत्रों में पेसा कानून को दरकिनार कर फर्जी ग्राम सभा करके आदिवासियों की जमीन लुटा जा रहा है।बिना अनुमति के जबरन अब तक दर्जनों पुलिस कैम्प,सी आर पी एफ कैम्प खोल दिया गया है,आदिवासियों की हितैषी कहने वाली भूपेश बघेल की कांग्रेस की सरकार ने भी अपनी निरंकुश चेहरा दिखा दिया है,पिछले साल 17 मई को पुलिस गोली चलाया जिसमें एक गर्ब्वती महिला सहित 4 लोग मारे गए, अब तक उसके परिजनों को कोई मदद नही मिला।अब तक जांच भी पूरी नही हुई है, पूर्व में और भी जो फर्जी मुठभेड़ हुई थी,जांच कमीटी की जांच रिपोर्ट आ गया है, लेकिन ना ही उसका खुलासा किया जा रहा है,और ना ही दोषियों पर कार्यवाही की जा रही है।उल्टा निर्दोष आदिवासियों पर तथाकथित माओवाद के नाम पर निर्मम दमन जारी है।

आंदोलन करी प्रमुख लोग जो मुख्यमंत्री, राज्यपाल महोदया से मुलाक़ात करने हेतु रायपुर आ रहे थे । विगत दिनों उन 9 साथियों को कोंडागांव मे रोक के उठा लिया था। हालांकि 7 दिन बाद छोड़ दिया गया। पुलिस द्वारा इनमें से कई लोगो को गिरफ्तारी की धमकियाँ दी जा रही है,आंदोलनकारियों पर फ़र्ज़ी केस दर्ज किया जा रहा है, इस तरह बस्तर में आदिवासियों के साथ जो खूनी खेल चल रहा है उसे तत्काल बंद करना चाहिए।विगत एक वर्ष से बस्तर के सिलेगार औऱ अन्य जगहों पर चल रहे आंदोलनकारियों के साथ विश्वासघात करना बंद करे,तत्काल आंदोलन कारियों से चर्चा करके उसका समाधान निकाला जाना चाहिए।

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