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खास खबर: रीयल एस्टेट में योजनाएं लांच करने की होड़, सवा चार माह में रिकार्ड 116 को रेरा से मंजूरी

मई के पहले सप्ताह में ही 11 नई योजनाएं लांच

रायपुर(realtimes) बिल्डिंग मटेरियल महंगा होने के कारण रीयल एस्टेट पर भी महंगाई की बड़ी मार पड़ी है। मकान बनाने की लागत करीब दो सौ रुपए वर्गफीट तक बढ़ गई है। इसके बाद भी रीयल एस्टेट में रिकार्डतोड़ योजना लांच हो रही हैं। कोरोना के कारण अब लोगों को अपने घर की अहमियत का अहसास हुआ है, क्योंकि कोरोना में वर्क फ्रॉम होम पर ज्यादा जोर दिया गया। इसके कारण रीयल एस्टेट को बड़ा फायदा हुआ है। नए साल के पहले सवा सवा चार माह में रिकार्ड 116 नई योजनाएं लांच हुई हैं। इस साल रिकार्डतोड़ योजनाएं आएंगी, ये तय है।

कभी किसी ने साेचा नहीं था कि घर पर बैठकर भी अपने दफ्तर का काम हाे सकता है, लेकिन काेराेना में वर्क फ्राॅम हाेम ने इसकाे सच साबित करके दिखाया और घराें की अहमियत बढ़ने से रीयल एस्टेट में पहली बार बड़ा बूम आया है। पिछले साल कोरोना के बाद रीयल एस्टेट में त्योहारी सीजन में बहुत घर बिके हैं। करीब छह सौ करोड़ का कारोबार हुआ है। इस काराेबार की रफ्तार ने पहले ही अहसास करा दिया था कि आने वाला साल रीयल एस्टेट के लिए बड़ा अच्छा साल हाेने वाला है। इसका आगाज भी हाे चुका है।

पहली बार रिकार्ड योजनाएं

रीयल एस्टेट से जुड़ी हर योजना को अब रेरा से मंजूरी लेनी पड़ती है। चाहे वह सरकारी योजना हो या फिर निजी योजना उनको रेरा में पंजीयन के बिना प्रारंभ नहीं किया जा सकता है। रेरा में जब फरवरी 2018 से पंजीयन प्रारंभ हुआ तो यही साल ऐसा रहा, जिसमें रिकार्डतोड़ 897 योजनाओं का पंजीयन हुआ। ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि हर बिल्डर को अपनी पुरानी योजनाओं का भी पंजीयन कराना जरूरी था। दूसरे साल पुरानी और नई योजनाओं को मिलाकर 192 योजनाएं मंजूर हुईं। 2020 में कोरोनाकाल होने के बाद भी 100 नई योजनाओं का पंजीयन रेरा में हुआ। 2021 में पिछले साल का रिकार्ड टूटा और 136 नई योजनाओं का पंजीयन हुआ। नए साल में योजनाओं की बाढ़ आ गई है। जनवरी में 20 योजनाएं लांच हुईं। अगले माह फरवरी में यह रिकार्ड टूटा और 23 योजनाएं आईं। मार्च में भी फरवरी का रिकार्ड टूटा और 26 योजनाओं का पंजीयन रेरा में हुआ। इसके बाद अप्रैल में नया रिकार्ड बना और 36 योजनाएं पंजीकृत हुईं हैं। मई के तो पहले सात दिनों में 11 नई योजनाएं आ गई हैं।

रायपुर पहले नंबर पर

प्रदेशभर में इस समय रेरा में 1440 योजनाओं का पंजीयन है। इसमें सबसे ज्यादा 700 योजनाएं रायपुर की हैं। इसके बाद बिलासपुर की 255 योजनाएं है। दुर्ग में 160 योजनाओं में से 50 योजनाएं पाटन में चल रही हैं। इसके अलावा रायगढ़ में 72, राजनांदगांव में 62, जांजगीर-चांपा में 29, कोरबा में 31, बस्तर में 27, धमतरी में 26, सरगुजा में 27 योजनाएं चल रही हैं। इसके अलावा छोटे जिलों में आधा दर्जन से लेकर एक दर्जन योजनाएं चल रही हैं।

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