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प्रदेश में 8 हजार कराेड़ की याेजनाओं पर महंगाई की ऐसी मार, ठेकेदार अब पुरानी दर पर काम करने नहीं हैं तैयार

रायपुर(realtimes) महंगाई ने एक तरफ जहां आम आदमी काे परेशानी में डाल दिया है, वहीं महंगाई के कारण सारे सेक्टर भी प्रभावित हाे रहे हैं। महंगाई से सरकारी काम भी अछूते नहीं रह गए हैं। लगातार बढ़ती महंगाई ने राज्य के ठेकेदराें की हालत पतली करके रख दी है। नया रायपुर में बन रहे नए सीएम हाउस के साथ मंत्रियों के बंगले, अंबिकापुर के मेडिकल कॉलेज, प्रदेश भर में चल रही प्रधानमंत्री आवास योजना के साथ दूसरी आवासीय योजनाएं, राजधानी का एक्सप्रेस वे, अंडर ब्रिज सहित पूरे प्रदेश में चल रहा सड़कों, नालियों, पूल, पुलिया के काम पर महंगाई की बड़ी मार पड़ी है। कीमत में जिस तरह का इजाफा हुआ है, उसको देखते हुए अब सरकारी ठेकेदारों ने एक तरह से कामों से हाथ खड़े कर दिए हैं। ठेकेदार अब यह अंतर की राशि और एसओआर में बदलाव के बिना योजनाओं को काम पूरा नहीं करना चाहते हैं। शनिवार को राजधानी में छत्तीसगढ़ कांट्रेक्टर एसोसिएशन के सभी जिलाध्यक्षों का जमावड़ा लगेगा, इसमें बड़ा फैसला होगा। संभव है काम बंद करने का ऐलान कर दिया जाए। पूरे प्रदेश में इस समय करीब आठ हजार करोड़ के काम चल रहे हैं।

प्रदेश भर में राजधानी रायपुर से लेकर सभी जिलों में कई तरह के सरकारी काम चल रहे हैं। लेकिन अब इन कामों पर महंगाई की मार पड़ने से सारे काम प्रभावित हो गए हैं। एक तरफ जहां सरिया की कीमत डबल से ज्यादा हो गई है। वहीं सीमेंट की कीमत भी डेढ़ गुना हो गई है। इसी के साथ हर तरह के मटेरियल की कीमत डेढ़ से दोगुनी हो गई है।

राजधानी में सबसे ज्यादा काम

सबसे ज्यादा काम राजधानी रायपुर में हो रहा है। यहां पर नया रायपुर में सीएम हाउस के साथ मंत्रियों के बंगले बन रहे हैं। यह योजना पांच सौ करोड़ से ज्यादा की है। इसी के साथ यहां पर एक्सप्रेस वे का काम चल रहा है। यह योजना 300 करोड़ की है। इसके अलावा गोगांव अंडरब्रिज के साथ दूसरे कामों को मिलाकर यहां पर दो सौ करोड़ के और काम चल रहे हैं। ये सारे काम इस समय पूरी तरह तो नहीं लेकिन बंद जैसी स्थिति में हैं।

अंबिकापुर में 200 करोड़ का मेडिकल कॉलेज अटका

अन्य जिलों की बात करें तो सबसे बड़ी योजना अंबिकापुर के मेडिकल कॉलेज की है। 200 करोड़ में बनने वाला मेडिकल कॉलेज भी प्रभावित हो गया है। इसका काम भी एक तरह से रूक गया है। यहां पर सरिया और सीमेंट से जुड़ा कोई भी बड़ा काम नहीं हो रहा है।     

3 हजार करोड़ की सड़कें

पूरे प्रदेश में इस समय करीब तीन हजार करोड़ का सड़कों का काम चल रहा है। एडीसी योजना और प्रधानमंत्री सड़क योजना में चल रहा काम प्रभावित हो गया है। रायपुर से धमतरी का एक्सप्रेस वे और कई सड़कों का काम ठेकेदार नहीं कर रहे हैं।

गरीबाें के मकान भी प्रभावित

प्रधानमंत्री आवास योजना का काम पूरे प्रदेश में ठेके पर दिया गया है। इसी के साथ गृह निर्माण मंडल छत्तीसगढ़, रायपुर विकास प्राधिकरण की कमल विहार, बोरियाखुर्द और इंद्रपस्थ योजना के साथ बस्तर और सरगुजा विकास प्राधिकरण की योजनाओं को मिलाकर दो हजार करोड़ की आवासीय योजनाएं प्रदेश में ठेकेदारों ने ले रखी है। इस समय इन योजना में मुश्किल से दस फीसदी काम हो रहा है।

अपने ही जाल में फंसे ठेकेदार

ठेकेदार इस समय पुराने एसओआर की दुहाई दे रहे हैं। लेकिन पुराना एसओआर न बदलने के पीछे ठेकेदारों द्वारा बिलो रेट में काम लेना प्रमुख है। जानकारों का साफ कहना है, ठेकेदार 40 फीसदी तक बिलो रेट में काम ले लेते हैं, यही वजह है कि विभाग एसओआर को नहीं बदलते हैं, जबकि हर साल इसको बदलने का प्रावधान है।

आज होगा बड़ा फैसला

छत्तीसगढ़ कांट्रेक्टर एसाेसिएशन लगातार बैठकें कर रहा है। एसाेसिएशन के अध्यक्ष बीरेश शुक्ला के मुताबिक आज दाेपहर को सभी जिलों के अध्यक्षों को बुलाया गया है। इसमें ही बड़ा फैसला होगा। संभावना है कि अंतर की राशि और एसओआर पर फैसला होने तक काम बंद कर दिया जाएगा।

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