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गांधी जी ने राजनीति को राम राज से जोड़ा- डॉ रमन

रायपुर(realtimes) महात्मा गांधी की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर विधानसभा के विशेष सत्र में पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन ने कहा कि गांधी जी की मौजूदगी इस देश में संत के रूप में थी. उन्होंने इस देश में राजनीति को रामराज से जोडने का काम किया. सत्य अहिंसा और अपरिग्रह को राजनीति से जोडने का काम किया.

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया की राजनीति में एक नया शब्दकोश देने वाले व्यक्ति महात्मा गांधी थे. सत्याग्रह का इतना प्रभावी प्रयोग किसी ने किया तो वे महात्मा गांधी ने किया. उनकी व्यापकता पूरी दुनिया में थी, नेल्सन मंडेला और मार्टिन लूथर किंग ने उनसे प्रेरणा ली. बाबा आम्टे औल विनोबा भावे ने पूरी जिंदगी उनकी प्रेरणा से जनहित में सौंप दी.उन्होंने कहा कि इन बातों का अहसास नई पीढी को करने की आवश्यकता है.

डॉ रमन ने कहा, सबसे अधिक बोलने, लिखने और पदयात्राओं के माध्यम से पूरे देश को नापने वाले महात्मा गांधी थे।गांधी के बैरिस्टर से महात्मा बनने की कहानी भी बड़ी दिलचस्प है. दक्षिण अफ्रीका के डरबन पहुंचने पर महसूस होता है कि वहां हिंदुस्तानियों का क्या हाल है।गांधीजी ने गिरमिटिया मजदूरों की पीड़ा समझकर देश को बदलने की प्रेरणा ली. अपमान पर अपमान सहकर महात्मा का जन्म हुआ और पूरी दुनिया को उसने नई राह दिखाई. सत्याग्रह की शुरुआत कर अहिंसा की नींव रखी, जेल गए लाठी खाए लेकिन कभी डिगे नहीं. अपनी धरती को छोड़कर कोई व्यक्ति कैसे 21 साल तक दूसरे देश में संघर्ष करते बीता रहा था, सोचना भी अकल्पनीय है.

दक्षिण अफ्रीका के हीरे के खदान में ही गांधी नामक हीरे का जन्म हुआ और भारत की आजादी की लडाई को उन्होंने आगे बढ़ाया. तिलक जी के निधन के बाद आजादी की लडाई और उसके नेतृत्व की जिम्मेदारी गांधीजी पर आ गई. इसी दौर में कंडेल के सत्याग्रह के लिए गांधीजी छत्तीसगढ़ आए और 21 दिसंबर 1920 में वहां पहुंचे.

डॉ रमन सिंह ने कहा कि हमें गर्व है कि गांधी जी हमारे प्रदेश में आए और कंडेल सत्याग्रह का नेतृत्व किया. छत्तीसगढ़ की विधानसभा ने आज इस अनूठी परंपरा के साथ गांधीजी को याद किया.इसलिए बेहतर होता कि हम सभी सकारात्मक संदेश देते, लेकिन गांधीजी से अधिक दूसरे विषयों पर बात हुई.उन्होंने कहा कि यह दो दिनों का सत्र बहुत उपयोगी था, इसका उपयोग हम इतिहास में नाम दर्ज कराने के लिए कर सकते थे. पांच योजनाओं की बातें कही गई लेकिन सभी योजनाएं पुरानी है, सुपोषण योजना 6 साल पुरानी है.

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