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बजट पर सुझाव नहीं, रोजगार के लिए प्रावधान करें सीतारमण- कांग्रेस

देश का बजट बनाना है भाजपा का घरेलू बजट नहीं

रायपुर(realtimes) छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने बजट पूर्व तैयारियों के संबंध में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा देश भर के भाजपा प्रतिनिधियों से मांगे गए सुझाव और छत्तीसगढ़ भाजपा के प्रतिनिधियों द्वारा दिये गए सुझावों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि सीतारमण बजट पर भाजपा के लोगों से सुझाव मांगने की नौटंकी करने की बजाय इस बजट में सात साल से बाकी 14 करोड़ रोजगार के लिए बजट का प्रावधान करें। हर व्यक्ति के खाते में पंद्रह लाख डालने के लिए भी तैयार रहें।

मोहन मरकाम ने कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को यह समझना चाहिए कि उन्हें देश का बजट बनाना है। यह भाजपा का घरेलू बजट नहीं है। आम बजट के लिए सलाह उन लोगों से ली जा रही है जिन्होंने छत्तीसगढ़ को कर्जे से लाद दिया।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा कि बीते तीन बजट में छत्तीसगढ़ की उपेक्षा की गई है और राजनीतिक भेदभाव किया गया है। भाजपा के लोग छत्तीसगढ़ के लिए मांग के नाम पर जो सलाह दे रहे हैं वे सभी कांग्रेस के सांसद संसद में और संसद के बाहर सरकार के मंत्रियों, अधिकारियों के स्तर पर लगातार उठाते रहे हैं। दोनों सदनों के कांग्रेस सांसद छत्तीसगढ़ के विकास और राज्य की जनता के हित की बात उठाते हैं तो छत्तीसगढ़ के भाजपा सांसद छत्तीसगढ़ के ही विरोध में खड़े हो जाते हैं।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा कि कांग्रेस द्वारा लगातार की जा रही इंटरनेशनल एयर कंनेक्टिविटी देने, बिलासपुर एयरपोर्ट की मांग, रायपुर में एयर कार्गो हब, राज्य में आर्मी बेस, रेल लाइन का विस्तार, समय सीमा में नए ओवर ब्रिज का निर्माण,दूरस्थ इलाकों में पोस्ट ऑफिस व एटीएम सेंटर्स, बैंकिंग सुविधा विस्तार, मेडिकल कॉलेज, एक्सप्रेस हाइवे का विस्तार सहित जनहित की तमाम मांगों पर केंद्र सरकार इसलिए ध्यान नहीं देती क्योंकि वह यहां की जनता से राजनीतिक प्रतिशोध की भावना रखती है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा कि भाजपा नेताओं ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को राज्यों के ऋण मामले में जो सुझाव दिया है, वह छत्तीसगढ़ विरोधी भाजपा मानसिकता की बानगी है। ये चाहते हैं कि छत्तीसगढ़ सहित सभी गैर भाजपा शासित राज्यों में आर्थिक आपातकाल लगा दिया जाय। पांच राज्यों के आगामी चुनाव में भाजपा अपने हश्र का पूर्वानुमान लगा चुकी है। जहां जहां इनकी राज्य सरकार हैं, वे सब चला-चली की बेला में हैं। इसलिए भाजपा के लोग यह सलाह दे रहे हैं कि राज्यों के लिए ऋण लेने के बाद उस राशि के उपयोग हेतु नियम जोड़ दें। पहले से ही देश में केंद्र राज्य के बीच सारे नियम कायदे मौजूद हैं तब भाजपा के लोग क्या और किसलिए नए नियम थोपने की सलाह दे रहे हैं।

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