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सरिया, सीमेंट की कीमत कम हाेने से प्रदेश में 20 हजार करोड़ के काम वापस लौटे पटरी पर

रायपुर(realtimes) मानसून के आने के बाद से राज्य में 20 हजार कराेड़ के सरकारी और निजी काम थम से गए थे। इनके थमने का एक कारण जहां बारिश रही, वहीं सरिया और सीमेंट की कीमत भी रही है। सरिया और सीमेंट की कीमत में आग लगने के कारण ही काम ज्यादा प्रभावित हुए। लेकिन अब सरिया की कीमत में जहां दस हजार से ज्यादा की गिरावट आ गई है, वहीं सीमेंट की कीमत वापस कम हो गई है। सरकारी काम में आने वाला नान ट्रेड सीमेंट वापस 250 रुपए हो गया है। खुले बाजार में भी सीमेंट की कीमत 270 से 300 हो गई है। ऐसा होने से सारे काम वापस पुरानी रफ्तार से होने लगे हैं।

बिल्डिंग मटेरियल में रेत और गिट्टी की कीमत जहां मानसून के कारण आसमान पर गई थी, वहीं सरिया की कीमत कोयला संकट के चलते आसमान पर चली गई थी। सरिया ने तो इतिहास में रिकार्डतोड़ कीमत का रिकार्ड बनाया है। एक माह पहले सरिया 65 हजार रुपए तक चला गया था। कीमत भले आसमान पर गई थी, लेकिन इसकी डिमांड न होने के कारण धीरे-धीरे इसकी कीमत टूटती चली गई और अब यह चिल्हर में 55 हजार रुपए टन पर आ गया है। इसी के साथ सीमेंट प्लांटों में ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल के कारण सीमेंट साढ़े तीन सौ रुपए के पार हो गया था। लेकिन अब इसकी कीमत 270 से 300 रुपए पर आ गई है। रेत की कीमत मानसून के कारण सबसे ज्यादा चली गई थी। इसकी कीमत 32 रुपए फीट तक चली गई थी। लेकिन इसकी कीमत भी कम होते-होते अब मीडियम रेत 13 से 14 रुपए फीट और बारीक रेत 17 से 18 रुपए पर आ गई है। इसी तरह से गिट्टी भी पुरानी कीमत 18 से 20 रुपए फीट हो गई है। गिट्टी भी 24 से 26 रुपए फीट तक चली गई थी।

सरकारी काम भी लाैटै पुरानी रफ्तार में

प्रदेश में इस समय करीब आठ हजार करोड़ के सरकारी काम चल रहे हैं। वैसे इन कामों की रफ्तार मानसून के कारण पहले से सुस्त रही थी, लेकिन सितंबर और अक्टूबर में ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल के कारण पहले सीमेंट बाजार से गायब हो गया, इसके बाद हड़ताल समाप्त होने पर सीमेंट की कीमत में इजाफा कर दिया गया। जहां नान ट्रेड सीमेंट 270 कर दिया गया, वहीं खुले बाजार में सीमेंट साढ़े तीन सौ हो गया था। इसी के साथ सरिया की कीमत भी 65 हजार तक चली गई थी। लेकिन डिमांड न होने के कारण अंतत: सीमेंट और सरिया की कीमत वापस कम हो गई है। ऐसे में वापस सारे सरकारी काम प्रारंभ हो गए हैं। कांट्रकेटर संघ के बीरेश शुक्ला का कहना है, अब लगभग सारी योजनाओं में काम वापस होने लगे हैं। इनकी रफ्तार भी पहले जैसे हो गई है। सरकारी काम में लगने वाला सरिया इस समय 52 हजार 700 रुपए टन मिल रहा है।

रीयल एस्टेट की याेजनाओं में फिर हाेने लगा काम

रीयल एस्टेट में पूरे प्रदेश में इस समय करीब 13 सौ योजनाओं पर काम चल रहा है। इन योजनाओं में कोई योजना 5 करोड़ की है तो कोई सौ तो कोई दो सौ करोड़ की योजना भी है। कुल मिलाकर 12 से 13 हजार करोड़ की योजनाएं चल रही हैं। सीमेंट और सरिया के कारण ये योजनाओं भी प्रभावित हो गई थीं, लेकिन अब वापस सारी योजनाओं में काम होने लगा है। क्रेड़ाई के पूर्व अध्यक्ष शैलेश वर्मा कहना है, रीयल एस्टेट की योजनाओं में स्लैब सहित क्रांकीट के बड़े काम रूक गए थे लेकिन अब सभी काम वापस होने लगे हैं।

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