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लाेकल मालभाड़ा कम नहीं, चिल्हर में घरेलु सामानों में चल रही मनमर्जी की लूट

रायपुर(realtimes) केंद्र और राज्य सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमत में सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी और वैट कम करके आम आदमी काे राहत देने का जाे काम किया है, उसका सीधा फायदा ताे मल रहा है लेकिन मालभाड़ा कम न हाेने से लाेगाें काे सामानाें के दाम अब भी ज्यादा देने पड़े रहे हैं। राज्य में लाेकल ट्रांसपाेर्टराें ने मालभाड़ा कम नहीं किया है, जबकि प्रदेश में बाहर से आने वाले माल का भाड़ा तो 15 फीसदी तक कम हो गया है। कारोबारी भी अभी ट्रांसपोर्टरों पर दबाव नहीं बना रहे हैं। पहले कहा गया प्रदेश सरकार के वैट कम होने का इंतजार है। वैट में मामुली कमी के बाद अभी कारोबारियों की ट्रांसपोर्टरों से बात नहीं हुई है। कारोबारी कहते हैं, जल्द ही बात करके समाधान निकाला जाएगा। लोकल मालभाड़ा कम न होने के कारण चिल्हर में सब्जी सहित घरेलु सामानों की कीमत पर असर पड़ रहा है। मालभाड़े का हवाला देकर चिल्हर कारोबारी मनमानी कीमत वसूल रहे हैं।

दीपावली के पहले केंद्र सरकार ने डीजल पर सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपए की कमी की। ऐसे में प्रदेश में 12.50 रुपए कीमत कम हुई है। कई राज्यों में कीमत इससे भी ज्यादा कम हुई है, क्योंकि राज्यों ने वैट भी कम कर दिया है। छत्तीसगढ़ में भी वैट कम किया गया है, लेकिन डीजल पर डेढ़ रुपए से भी कम कीमत कम हुई है। अब कीमत कम होने के कारण डुमरतराई के किराना और अन्य सामानों के साथ सब्जी के भी थोक कारोबारी ट्रांसपोर्टरों पर मालभाड़ा कम करने के लिए दबाव बनाने वाले हैं।

30 फीसदी तक बढ़ा है भाड़ा

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार इजाफा होने के कारण इसकी कीमत पूरे देश में सौ रुपए के पार हो गई थी। ऐसे में ट्रांसपोर्टरों ने भारी दबाव बनाकर मालभाड़ा 25 से 30 फीसदी बढ़ा दिया। कारोबारियों का कहना है, डुमरतराई से रायपुर शहर में पहले तो छोटे मालवाहकों में माल तीन से चार सौ रुपए में जाता था, वह पांच से छह सौ रुपए कर दिया गया। इसी के साथ धमतरी, महासुमंद जैसे शहरों में जो माल पहले हजार रुपए में ज्यादा था, उसका भाड़ा 14 से 15 सौ रुपए कर दिया गया।

बाहर का भाड़ा हुआ कम

सबसे ज्यादा भाड़ा बाहर से आने वाले माल का बढ़ा था। मुंबई, दिल्ली, गुजरात से जो एक ट्रक माल पहले 70 से 80 हजार में आता था, वह एक लाख तक हो गया था। लेकिन अब डीजल की कीमत कम होने से भाड़ा कम हो गया है। थोक सब्जी एसोसिएशन के अध्यक्ष टी. श्रीनिवास रेड्डी के मुताबिक कर्नाटक से एक ट्रक माल का भाड़ा पहले सवा लाख रुपए लगता था, जो अब एक लाख दस हजार लग रहा है। इसमें 15 हजार की कमी आई है। इसी तरह से बंगाल से आलू का एक ट्रक 75 हजार में आता था, जो अब 70 हजार में आ रहा है। इसी तरह से महाराष्ट्र और अन्य राज्यों से आने वाले माल में भी भाड़ा कम हुआ है। किराना सामान, दाल, तेलों का मालभाड़ा भी कम हो गया है। इसके कारण इनकी कीमतों में भी कुछ कमी आ गई है।

चिल्हर में मनमर्जी वाले दाम

लोकल मालभाड़ा कम न होने के कारण चिल्हर कारोबारी मनमर्जी वाली कीमत वसूल रहे हैं। यही वजह है कि जब जिस सब्जी की थोक में कीमत 20 रुपए रहती है, उसकी चिल्हर में कीमत 30 से 35 रुपए और जिसकी कीमत थोक में 50 रुपए रहती है, उसकी 70 रुपए तक वसूली जा रही है। ग्राहकों को कारोबारी कहते हैं मालभाड़ा ज्यादा लग रहा है। इसी तरह से तेल कीमत भी चिल्हर में 10 से 15 रुपए ज्यादा ली जा रही है। दालों के साथ अन्य सामानों में 10 से 20 रुपए चिल्हर कारोबारी ज्यादा वसूल रहे हैं।

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