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निकाय चुनाव में कांग्रेस अपनी सरकार के कामाें और भाजपा कांग्रेस की वादाखिलाफी पर मांगेगी वाेट

रायपुर(realtimes) प्रदेश में अगले माह होने वाले नगरीय निकाय चुनाव में सत्ताधारी कांग्रेस ने जहां अपनी तीन साल की सरकार के कामाें काे लेकर जनता से वाेट मांगने का फैसला किया है, वहीं भाजपा कांग्रेस सरकार की वादाखिलाफी काे लेकर जनता से वाेट मांगेगी। चुनाव में सबकी नजर चार नगर निगमों पर टिकी है। इनमें जीतने के लिए राजनीतिक दलाें से तैयारी प्रारंब कर दी है। इस माह के अंत तक प्रत्याशियाें का भी चयन हाे जाएगा।

राजधानी रायपुर के दूसरे नगर निगम बीरगांव और दुर्ग जिले के तीन नगर निगमों रिसाली, भिलाई-चरौदा और भिलाई नगर निगम में चुनाव होने जा रहा है। इन निगमों में स्थानीय मुद्दों के साथ राज्य स्तर के भी कई मुद्दे चुनाव में प्रभाव डालेंगे। यही वजह है कि चुनाव का ऐलान होते ही कांग्रेस और भाजपा ने चुनावी मुद्दों को लेकर तैयारी कर ली है। नगरीय निकायों के चुनाव के लिए एक तरफ जहां शनिवार से नामांकन का दौर प्रारंभ हो गया। वहीं भाजपा और कांग्रेस में प्रत्याशियों के चयन को लेकर भी कवायद प्रारंभ हो गई है। सबसे अहम चार नगर निगमों पर नजरें हैं।

 संपित्तकर आधा न हाेना बड़ा मुद्दा

बीरगांव नगर निगम में एक साल विलंब से चुनाव हो रहा है। यहां सड़क, पानी, बिजली और सफाई के साथ बड़े मुद्दे के तौर पर संपत्ति कर आधा करने और अमृत मिशन में लेटलतीफी है, जो अब तक अटका हुआ है। एक तरफ जहां भाजपा और कांग्रेस जैसे बड़े राजनीतिक दलों के प्रत्याशी मैदान में होंगे। वहीं जोगी कांग्रेस ने भी दमखम के साथ सभी 40 वार्डों में अपने प्रत्याशी उतारने का फैसला किया है। हर पार्टी के अपने-अपने मुद्दे हैं।

कांग्रेस विकास के मुद्दे पर लड़ेगी

कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला का कहना है, हमारी पार्टी की तीन साल से प्रदेश में सरकार है। हमारी सरकार ने तीन साल में जो विकास के काम किए हैं, उनको लेकर हम जनता के बीच जाएंगे। बीरगांव में भाजपा के शासनकाल में कोई काम नहीं हुआ। हम वहां पर विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ेंगे। हमारी सरकार ने जिस तरह से काम नगरीय निकायों में किए हैं और विकास के लिए जिस तरह से सरकार ने मदद की है, उसका फायदा हमारी पार्टी को मिलेगा।

कांग्रेस की वादाखिलाफी बड़ा मुद्दा

भाजपा के लिए चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा कांग्रेस की वादाखिलाफी है। भाजपा के शहर जिला अध्यक्ष श्रीचंद सुंदरानी का कहना है, हम लोग लगातार बैठकें लेकर वहां के भाजपा पार्षदों से चर्चा कर रहे हैं। इसमें जो बात सामने आ रही है, वह यह है कि बीरगांव में अमृत मिशन योजना को पूरा नहीं किया गया है। पाइप लाइन के लिए गड्ढे कर दिए गए हैं, लेकिन काम नहीं हो सका है। इसके अलावा सबसे बड़ा मुद्दा संपत्तिकर का है। कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में वादा किया था, इसको आधा करने का। कांग्रेस तीन साल से सत्ता में है, लेकिन अब तक किसी भी नगर निगम में संपत्ति कर आधा नहीं किया गया है। निगम में विकास के काम पूरी तरह से बंद हैं।

जोगी कांग्रेस का बड़ा दावा

बीरगांव में जोगी कांग्रेस के एकमात्र महापाैर पद के दावेदार एवज देवांगन का कहना है, भाजपा और कांग्रेस विकास की बात करते हैं, लेकिन इसके लिए पैसा कहां से आएगा, इस पर चुप हो जाते हैं। अगर राज्य सरकार पैसा देगी तभी विकास होगा। लेकिन हमारी पार्टी बाहर से पैसा लाकर विकास करेगी। उनका कहना है, बीरगांव निगम में 852 उद्योग हैं। इनसे संपत्तिकर के रूप में हर साल एक अरब रुपए मिल सकते हैं। इनसे संपत्तिकर नहीं लिया जाता है। हम लोग इनसे संपत्तिकर लेकर विकास करेंगे।

भिलाई के तीन निगमों में झोंकी ताकत

दुर्ग जिले के तीन बड़े निकायों का चुनाव परिणाम कई राजनीतिक संदेशों से भरा होगा। कांग्रेस सरकार के तीन बरस के कामकाज पर जनमत की तरह यह परिणाम देखा जाएगा। शिवनाथ से खारून तक बसे दुर्ग जिले में प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र के लोग निवासरत है। खासकर भिलाई व रिसाली ऐसा नगर निगम है, जहां सभी वर्ग, धर्म, क्षेत्र के लोग रहते है। यहां का परिणाम आने वाले समय की ओर संकेत देने वाला होगा। चुनाव की गंभीरता को समझते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू, पीएचई मंत्री गुरू रूद्रकुमार, विधायक देवेंद्र यादव ने पूरी ताकत झोंक दी है।

रिसाली में पहली बार चुनाव

भिलाई नगर निगम को विभाजित कर रिसाली को एक नया नगर निगम बनाया गया है। भिलाई नगर निगम में 70 वार्ड थे। जिनमें से 29 में कांग्रेस व 28 में भाजपा के पार्षद निर्वाचित हुए थे। जबकि 13 पार्षद निर्दलीय चुनाव जीतकर आए थे। नगर निगम अध्यक्ष के चुनाव के समय 5 पार्षद कांग्रेस और 6 पार्षद भाजपा में शामिल हो गए। 2 निर्दलीय पार्षद पूरे कार्यकाल सदन में सक्रिय रहे। इसी तरह भिलाई-3 चरोदा नगर निगम में पिछले चुनाव में कुल 40 वार्डों में से 13 कांग्रेस, 16 भाजपा और 11 निर्दलीय पार्षद चुनाव जीते थे। निर्दलियों के साथ मिलकर कांग्रेस यहां सभापति चुनाव जीतने में सफल हो गई थी। इन परिणामों को देखते हुए इस बार महापौर का चुनाव बेहद रोचक हो सकता है। निर्दलीय इस बार भी अहम भूमिका में होंगे।

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