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PM Modi के शांति और प्रेम के संदेश के साथ जम्मू-कश्मीर पहुंचे गृह मंत्री Amit Shah

श्रीनगर : संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की जम्मू-कश्मीर की पहली तीन दिवसीय यात्र, घाटी में आतंकवादियों द्वारा नागरिकों पर हालिया हमलों की पृष्ठभूमि में काफी महत्वपूर्ण हो गई है।

पिछले एक पखवाड़े के दौरान आतंकवादियों ने अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों को निशाना बनाया है और पांच गैर-स्थानीय मजदूरों सहित 11 नागरिकों की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। जवाबी कार्रवाई में पुलिस और सुरक्षा बलों ने 15 आतंकवादियों को मार गिराया है और शेष आतंकवादियों की तलाश जारी है। केंद्रीय गृह मंत्री एक सुरक्षा समीक्षा बैठक, एक एकीकृत उच्च कमान बैठक, श्रीनगर-शारजाह उड़ान को हरी झंडी दिखाने और जम्मू में एक रैली को संबोधित करने वाले हैं। उनका शेड्यूल या कार्यक्रम काफी व्यस्त है। शाह की यात्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए शांति और प्रेम का संदेश है, जो पिछले तीन दशकों से नियंत्रण रेखा के दूसरी ओर से हमले का सामना कर रहे हैं।


5 अगस्त, 2019 को केंद्र ने जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म करके एक साहसिक निर्णय लिया और इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया और तत्कालीन रियासत के भारत संघ के साथ एक बार के लिए बहस को समाप्त कर दिया। तब से जम्मू-कश्मीर ने बड़े पैमाने पर विकास देखा है और पीछे मुड़कर नहीं देखा है। एक नई सुबह की शुरूआत ने शांति, समृद्धि और प्रगति के युग की शुरूआत की है। लेकिन नियंत्रण रेखा के पार बैठे लोगों को यह विश्वास करना मुश्किल हो रहा है कि जम्मू-कश्मीर के निवासियों ने अलगाववाद और तथाकथित आजादी के विचार को खारिज कर दिया है। जम्मू-कश्मीर के लोगों ने समावेशी भारत के विचार का समर्थन किया है और पिछले दो वर्षों के दौरान उन्होंने निस्संदेह साबित कर दिया है कि मुट्ठी भर निहित स्वार्थ वाले लोग उन्हें गुमराह नहीं कर सकते।


केंद्रीय गृह मंत्री, अमित शाह, घाटी में हालिया हत्याओं के मद्देनजर अपनी जम्मू-कश्मीर यात्र को टाल सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। उनकी यात्र शांति विरोधी तत्वों के लिए एक संदेश है कि नई दिल्ली जम्मू-कश्मीर को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है और अब पीछे मुड़कर नहीं देखा जाएगा। नागरिकों की हालिया लक्षित हत्याओं ने भले ही शांति भंग की हो, लेकिन कश्मीर के लोगों के वापस लड़ने और फिर से खड़े होने के संकल्प को नहीं तोड़ा है। हमलों के बाद कई गैर-स्थानीय लोग कश्मीर छोड़ चुके हैं, लेकिन काफी लोग अभी भी वहीं रुके हुए हैं। उन्हें कश्मीर की जनता और सरकार पर पूरा भरोसा है।

कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों को तेज करने वाले सुरक्षा बल आतंकवादियों के लिए एक स्पष्ट संकेत है कि वे 90 के दशक की स्थिति को फिर से नहीं बना सकते हैं और अगर वे एलओसी के पार बैठे अपने आकाओं की धुन पर नाचते रहे तो वे अपनी जान गंवा देंगे। कश्मीर में नागरिकों पर हाल के हमलों के बाद, अमित शाह ने नई दिल्ली में उच्च स्तरीय सुरक्षा बैठकों की अध्यक्षता की और कश्मीर में आतंकवादियों और उनके आकाओं एवं हमददरें के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए। पिछले 15 दिनों के दौरान पूरे घाटी में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। अल्पसंख्यक समुदायों के सदस्यों को सुरक्षा प्रदान की गई है और नागरिकों पर और किसी भी हमले को विफल करने के लिए कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

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