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सारे निर्माण कार्य बंद, डिमांड नहीं के बराबर, फिर भी सरिया, सीमेंट की कीमत आसमान पर

रायपुर(realtimes) मानसून के कारण लंबे समय से प्रदेश में सारे सरकारी कामों के साथ रीयल एस्टेट और निजी निर्माण कार्य भी लगभग बंद हैं। इसकी वजह से न तो सरिया की डिमांड है और न ही सीमेंट की। लेकिन इसके बाद भी इनकी कीमत आसमान पर चली गई है। सरिया की कीमत पहली बार 65 हजार रुपए टन हो गई है। इसके पीछे का कारण कोयला संकट है। इधर सीमेंट अब तक बाजार में साढ़े तीन सौ रुपए बोरी में बिक रहा है। इसका कारण ट्रांसपोर्टरों की 37 दिनों तक चली हड़ताल है। हड़ताल समाप्त हो गई है, लेकिन अभी प्लांटों से पूरी तरह से सीमेंट की सप्लाई बाजार में नहीं हो रही है।

देश भर में कोयला संकट के कारण चाैतरफा हाहाकार मचा हुआ है। काेयला संकट के कारण ही उद्योगों की हालत खराब हो गई है।अपने राज्य में एक माह में सरिया की कीमत में नौ हजार रुपए का इजाफा हुआ है। स्पंज आयरन की कीमत भी रिकार्ड 36 हजार पर पहुंच गई है। डेढ़ माह पहले इसकी कीमत 30 हजार रुपए थी।

सरिया 65 हजार रुपए टन

सरिया के उत्पादन से जुड़े कारोबारियों का कहना है, पहली बार सरिया की कीमत इतनी हुई है। इस समय 10 से 20 एमएम सरिया की बेसिक कीमत 50 हजार और 8 एमएम सरिया की बेसिक कीमत 53,500 हजार है। इसके अलावा 9630 हजार रुपए जीएसटी है। ऐसे में थोक में कीमत 63130 हजार हो गई है। चिल्हर में मालभाड़ा और चिल्हर कारोबारियों का मुनाफा मिलाकर यह 65 हजार तक बेचा जा रहा है। सरिया के पहले की रिकार्ड कीमत की बात करें तो पिछले साल नवंबर और दिसंबर में कच्चे माल की कीमत आसमान पर जाने के कारण सरिया की कीमत लगातार बढ़ी थी। तब आयरन ओर की कीमत के कारण जहां स्पंज आयरन की कीमत आसमान पर पहुंच गई थी, वहीं सरिया चिल्हर में 60 हजार रुपए हो गया था। इसके बाद फरवरी में इसकी कीमत में 15 हजार की कमी आई थी। बेसिक कीमत 50 हजार से सीधे 35 हजार हो गई थी।

सीमेंट की कीमत में राहत का इंतजार

सीमेंट की कीमत में पिछले डेढ़ माह से आग लगी हुई है। पिछले माह ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल के पहले की बात करें तो सीमेंट की कीमत थोक में 250 और चिल्हर में 260-270 रुपए थी। लेकिन 9 सितंबर से ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल के बाद इसकी कीमत में तेजी आती चली गई। स्थिति यह हो गई की माल की किल्लत के कारण इसकी कीमत साढ़े तीन सौ रुपए तक जा पहुंची। इस समय भी बाजार में इसी कीमत पर सीमेंट बिक रहा है। इसका कारण विक्रेता यह बताते हैं कि अब तक सीमेंट प्लांटों से माल बाजार में नहीं पहुंचा है। ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल शुक्रवार की रात को समाप्त हुई। इसके बाद शनिवार और रविवार होने के कारण बढ़ा मालभाड़ा सीमेंट प्लांटों के सिस्टम में अब तक अपलोड़ नहीं हो सका है। यही कारण है कि सीमेंट प्लांटों से माल बाहर नहीं आ रहा है। इधर साेमवार के बाद से कुछ सीमेंट प्लांटाें सेमाल बाहर  आ रहा है, लेकिन चिल्हर काराेबारी अपना पूरा स्टाक खपाने में लगे हैं, इसलिए कीमत कम नहीं हाे रही है।

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