businessState

सीमेंट प्लांटों में हड़ताल से 40 हजार ट्रकों के पहिए थमे, 500 करोड़ का लग चुका है फटका

रायपुर(realtimes) ट्रांसपोट्ररों की मालभाड़े को लेकर एक माह से चल रही हड़ताल के कारण जहां 40 हजार से ज्यादा ट्रकोें के पहिए थमे हुए हैं, वहीं ट्रांसपोर्टराें काे 500 कराेड़ का फटका लग चुका है। सीमेंट काराेबारियाें काे भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।  इनसे जुड़े एक लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हैं। ट्रक संचालकों के सामने ट्रकों की ऋण की किस्तें पटाने की समस्या खड़ी हो गई है। सीमेंट प्लांट मालिक मालभाड़ा बढ़ाने तैयार नहीं हैं।

डीजल की लगातार बढ़ती कीमत को लेकर ट्रांसपोर्टरों ने सीमेंट प्लांटों में हड़ताल कर दी है। 9 सितंबर से पहले चार प्लांटों को छोड़कर बाकी में हड़ताल की गई, लेकिन 12 सितंबर से सभी प्लांटों में हड़ताल कर दी गई है। एक माह हो गए हैं, पर सीमेंट प्लांट और संचालकों के साथ ट्रांसपोर्टरों की सुलह नहीं हो रही है। ऐसे में ट्रकों का संचालन करने वालों के सामने बड़ी परेशानी खड़ी हो गई है।

500 सौ करोड़ का फटका

परिवहन बंद होने के कारण सबसे बड़ा नुकसान ट्रांसपोर्टरों को हुआ है। सीमेंट का परिवहन करने में 40 हजार ट्रक लगे हैं। एक ट्रक संचालक को हर माह एक से सवा लाख का काम मिल जाता है। ऐसे में एक माह में पांच सौ करोड़ का काम प्रभावित हो गया है। इसी के साथ ट्रकों में काम करने वाले एक लाख से ज्यादा ड्राइवर और क्लीनरों के सामने घर चलाने का संकट खड़ा हो गया है। ट्रक संचालकों से जो संभव हो रही है, मदद कर रहे हैं, लेकिन हड़ताल लंबी चली तो परेशानी होगी, क्योंकि ट्रक संचालकों ने भी बैंकों से ऋण लेकर ट्रकें लीं हैं। उनके सामने भी अब ऋण की किस्तें जमा करने की समस्या आ गई है।

कारोबारियों को भी नुकसान

सीमेंट का परिवहन न होने के कारण इसका कारोबार करने वालों को भी भारी नुकसान हो रहा है। खासकर रायपुर में माल की सप्लाई बहुत कम है। इसी के साथ बाकी शहरों में भी बहुत कम माल जा रहा है। जिनकी दुकानों में रोज हजार बोरी तक का माल खप जाता था, उनको आधा माल भी नहीं मिल पा रहा है। कारोबारियों को भी एक माह में लाखों की चपत लग चुकी है।

नहीं बन रही सहमति

ट्रांसपोर्टर संघ के सुखदेव सिंह सिद्धू ने बताया, एक दिन पहले भी सीमेंट प्लांटों से बात हुई, पर बात नहीं बनी है। प्लांट भाड़ा बढ़ाने तैयार नहीं हैं। उनका कहना है डीजल की कीमत लगातार बढ़ रही है। हड़ताल के चलते हुए ही चार रुपए कीमत बढ़ गई है। जो मालभाड़ा मिल रहा है, उसमें खर्च ही नहीं निकल पाता है तो परिवहन कैसे संभव है।

अपने मोबाइल पर REAL TIMES का APP डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लिक करें

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
COVID-19 LIVE