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कृषि कानून के खिलाफ राजिम में जुटे हजाराें किसान, टिकैत बाेले- सरकार जब तक कानून वापस नहीं लेगी, तब तक किसान पीछे हटने वाले नहीं

रायपुर(realtimes) किसान आंदाेलन की धमक अब छत्तीसगढ़ तक आ पहुंची है। राकेश टिकैत के नेतृत्व में राजिम में हजाराें की संख्या में किसान जुटे और केंद्र सरकार के कृषि कानून पर विराेध जताया। महापंचायत के मंच से राकेश टिकेत ने कहा कि ये आंदोलन, क्रांति का आगाज है. गांव से निकलकर हमें शहरों की ओर बढ़ना होगा। भारत सरकार जब तक कानून वापस नहीं लेगी, तब तक किसान पीछे हटने वाले नहीं है।

श्री टिकैत का कहना है कि मोदी सरकार के तीन काले कानून को रद्द करना होगा। मोदी सरकार कहती है एमएसपी रही है रही थी और रहेगी। हम भी कहते हैं कि सरकार नहीं है नहीं थी और नहीं रहेगी। श्री टिकैत ने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ के सभी तरह के किसानों को भी एमएसपी मिले, गौ पलकों को, सब्जी किसानों को, धान या अरहर से अलग जो भी किसान है उन्हें भी उनके उत्पादों को समर्थन मूल्य मिले।

युवा आंदाेलन काे जनृजन तक पहुंचाएं

श्री टिकैत ने देश के युवाओं से युवा को आगे आने के लिए कहा। युवाओं को सोशल मीडिया के जरिए जन-जन तक आंदोलन को पहुंचाना होगा। ट्विटर, फेसबुक, यूट्यूब के जरिए आंदोलन को आगे बढ़ाना होगा।

देश भर के किसान काले कानून के खिलाफः मेघा पाटकर

मेधा पाटकर ने शहीद शंकर गुहा नियोगी जिंदाबाद नारे के साथ भाषण शुरुआत की और उन्होने अपने भाषण में मोदी का जिक्र करते हुए कहा कि देश भर के किसान मोदी सरकार के काले कानून के खिलाफ हैं। जल-जंगल-जमीन हमारी है. छत्तीसगढ़िया लोगों की जमीन कोई नहीं छीन सकता। पूंजीपतियों के हाथों देश की सार्वजनिक संपदा को बेचने का काम मोदी सरकार कर रही है। मेधा पाटकर ने भूपेश सरकार की तारीफ की, उन्होने कहा कि भूपेश सरकार ने 25सौ रुपए में धान खरीदा है। बघेल सरकार से आह्वान है कि केंद्र सरकार के कानून में संसोधन न करें बल्कि राज्य का अपना कानून लाएं।

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