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बर्बाद धान का आंकड़ा बढ़ा, 14 लाख क्विंटल के पार

रियल टाइम्स एक्सक्लूसिव- लगातार- 2

रायपुर(realtimes exclusive) छत्तीसगढ़ में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदे गए धान का एक बड़ा हिस्सा 13 लाख क्विंटल सड़कर,सूखकर बर्बाद होने का आंकड़ा सामने आने के बाद भी अभी नुकसानी को भयंकर बनाने वाले आंकड़े सामने आ रहे है। रविवार को रियलटाइम्स में प्रमुखता से प्रकाशित खबर में बताया गया था कि 16 सिंतबर की स्थिति में 13 लाख क्विंटल धान खराब हुआ है।यह भी कहा गया था कि यह आंकड़ा बढ़ सकता है। अब जानिए कि ये बढ़ोत्तरी कितनी हुई है।

विश्वस्त सूत्रों के अनुसार  27 सितंबर तक की स्थिति में  14 लाख 12 हजार 762 क्विंटल धान सूखत में गया बताया गया है। खास बात ये है कि प्रदेश में एमएसपी पर धान खरीदने वाले उपार्जन केंद्रों की संख्या 2 हजार 311 है इनमें से 2 हजार 171 उपार्जन केंद्रों के हिसाब किताब से ये बर्बादी सामने आई है। अभी भी 240 धान उर्पाजन केन्द्रों का हिसाब होना बाकी है। यह जानकारी सामने आने के बाद इस मार्कफेड अधिकारियों के इस दावे की पुष्टि हो गई है जिसमें कहा गया था कि अभी हिसाब पूरा नहीं हुआ है। प्रोसेस में है।

आंकड़ा बढ़ने के दावे की पुष्टि भी

रियल टाइम्स की खबर में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया था कि 16 सितंबर की स्थिति के बाद धान की बरबादी के आंकड़े बढ़ेगे। इस दावे की पुष्टि 27 सितंबर की रिपोर्ट से इस दावे की पुष्टि हो गई है। हमारे उच्च पदस्थ जानकार सूत्रों ने ये दावा भी किया है कि यह आंकड़ा 15 लाख क्विंटल तक जा सकता है। वजह ये है कि अभी जिन 240 उपार्जन केंद्रों का हिसाब होना बाकी है उनमें कई बड़े केंद्र हैं, जहां धान भी बड़ी मात्रा में रखा गया था। इसमें से कितना बाकी है और कितनी मात्रा में धान का नामोनिशान मिट गया है। यह आने वाले दिनों में साफ होगा। ध्यान रहे,धान की ये बर्बादी की कहानी केवल सोसायटियों के उपार्जन केंद्रों की है। अभी तो मार्कफेड के संग्रहण केंद्रों में रखे और बरबाद हो चुकी धान की तस्वीर सामने आना बाकी है। (क्रमशः)

यह भी पढ़ें: 13 लाख क्विंटल धान बर्बाद,सड़ा, सूखा या भीगकर हुआ खराब, हिसाब-किताब प्रोसेस में है

27 सितंबर, नव भारत में प्रकाशित
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