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असम में एनआरसी की सूची अंतिम है या नहीं

नई दिल्ली  :  असम में तैयार एनआरसी को कानूनी वैधता प्रदान के मामले पर अब तक कोई फैसला नहीं हुआ है। इस वजह से लाखों लोगों का भविष्य अधर में लटका है।असम में तैयार एनआरसी को कानूनी वैधता प्रदान के लिए रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया ने अब तक कोई अधिसूचना जारी नहीं की है। लेकिन इस बीच, एक न्यायाधिकरण ने एक व्यक्ति को भारतीय घोषित करते हुए इसे एनआरसी की अंतिम सूची करार दिया है। न्यायाधिकरण एक व्यक्ति की नागरिकता पर सुनवाई कर रहा था। हालांकि असम सरकार ने चार सितंबर को जारी एक आदेश में ऐसे न्यायाधिकरणों से एनआरसी पर ऐसी टिप्पणी नहीं करने को कहा था। राज्य में तैयार एनआरसी शुरू से ही विवादों में रही है। दो साल पहले इसकी अंतिम सूची प्रकाशित होने पर लाखों लोग सूची से बाहर रहे थे। उसके बाद राज्य की बीजेपी सरकार ने यह कवायद नए सिरे से करने की सिफारिश की है। तस्वीरों मेंः जब जब शहर शहर शाहीन बाग बना फिलहाल कुछ मामलों में दोबारा सत्यापन की मांग में उसने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है जो लंबित है।

उधर, एक गैरसरकारी संगठन ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में एनआरसी को अपडेट करने की कवायद में 360 करोड़ रुपए के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। ताजा मामला असम के एक न्यायाधिकरण ने सोमवार को एक अहम फैसले में कहा है कि 31 अगस्त 2019 को प्रकाशित राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) की सूची अंतिम है। लेकिन राष्ट्रीय जनसंख्या महापंजीयक ने इसे अभी अधिसूचित नहीं किया है। 1999 के तहत दर्ज किया गया था। न्यायाधिकरण की ओर से इस मामले में जारी आदेश में कहा गया है कि सिंह का नाम अंतिम एनआरसी में शामिल होने से साफ है कि परिवार के अन्य सदस्यों से उसका रिश्ता है। हालांकि मामला न्यायाधिकरण में लंबित होने की वजह से उसकी नागरिकता कानूनी तौर पर स्थापित नहीं हो सकी। गीत और ढफली बने हथियार बिक्रम सिंह इस समय बेंगलुरू में काम करते हैं। उन्होंने न्यायाधिकरण के सामने अपनी भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए कई प्रमाण दिए थे। इसमें 1968 में उनके दादा के नाम से जमीन, भारतीय वायु सेना में पिता की नौकरी के सबूत के अलावा एनआरसी की सूची, मतदाता सूची और आधार कार्ड की प्रतियां भी दी गई थी। तमाम सबूतों को देखने के बाद न्यायाधिकरण ने कहा कि हम मानते हैं बिक्रम विदेशी नहीं, बल्कि भारतीय नागरिक हैं। सूची पर विवाद असम सरकार लगातार मांग कर रही है कि कि एनआरसी की सूची को दुरुस्त करने के लिए शामिल हुए लोगों में से 10 से 20 फीसदी तक की दोबारा पुष्टि की जानी चाहिए। अंतिम सूची प्रकाशित होने के बाद से ही राज्य के तमाम संगठन इसे त्रुटिपूर्ण बताते हुए इसे खारिज करने की मांग करते रहे हैं।

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