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काराेबारी मुनाफाखाेरी में मस्त, आम आदमी घर का खर्च डबल हाेने से त्रस्त

रायपुर(realtimes) महंगाई की ऐसी आग लगी है कि आम आदमी का जीना मुश्किल हाे गया है। जिस घर का खर्च पहले दस हजार था, वह सीधे डबल हो गया है। इसकी सबसे बड़ी मार मध्यम वर्ग और निजी नाैकरी करने वालाें पर पड़ रही है। वेतन ताे उतना ही है, पर खर्च डबल हाे गया है, ऐसे में आखिर घर का खर्च चले ताे चले कैसे। घर का खर्च बढ़ने के पीछे का कारण यह है कि कोरोना काल में सभी तरह की चीजाें के दाम डेढ़ से दाे गुना हाे गए हैं। चाहे वह पेट्राेल-डीजल की बात हाे, खाद्य तेल हाे, राशन के अन्य सामान हाे या फिर घरेलु उपयाेग की दूसरी जीचें हाें। सबकी कीमत में आग लगी हुई है। 

दाे साल में लगे लाकडाउन के कारण जहां लोगों का वेतन कम हो गया, वहीं थोक में नाैकरियां भी चलीं गईं। डेढ़ साल से लोग कोरोना से निपटने की मशक्कत कर रहे हैं। कोरोनाकाल में कारोबार बंंद होने का रोना खूब रोया गया, नुकसान होने की दुहाई दी गई, पर सच्चाई यह है कि जिनका भी नुकसान हुआ है, उनमें से ज्यादातर ने आपदा में अवसर तलाश कर जमकर मुनाफाखोरी करने का काम किया है। अपने नुकसान की भरपाई करने सरकारी से लेकर निजी कंपनियां और कारोबारियों ने हर सेक्टर में अपनी चीजाें के दाम बढ़ाए हैं। खाद्य तेलों से लेकर पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस, दालें, मसालें, साबुन, राशन, स्टील, सीमेंट, इलेक्ट्रानिक्स सहित हर सेक्टर में कीमतों में भारी इजाफा हुआ है। कुछ सेक्टर ऐसे हैं, जहां सौ से दो सौ फीसदी कीमतें बढ़ीं हैं।

काेरोना की पिछले साल आमद होने के बाद से आम आदमी का जीना मुश्किल हो गया है। इसकाे लेकर पिछले साल से लॉकडाउन का एक नया पेर्टन पहली बार देश में प्रारंभ हुआ। लॉकडाउन ने हर सेक्टर की कमर तोड़ने का काम किया। लेकिन आपदा में भी हर सेक्टर से अवसर भी तलाश लिया और पिछले साल से इस साल तक लगे लॉकडाउन में जिन सेक्टरों को नुकसान हुआ, उसकी भरपाई करने के लिए आम जनता को बलि का बकरा बनाया गया है।

खाद्य तेलों की कीमत में आग

काेरोनाकाल से पहले की बात करें तो साल भर पहले तेलों की जो कीमत थी, उसमें कुछ तेलों में तो सौ फीसदी तक कीमतें बढ़ गईं हैं। सबसे कम कीमत वाला सोया का कीर्ति गोल्ड और राइसब्रान तेल 75 से 80 रुपए में बिकता था, लेकिन आज इस तेल की कीमत 150 से 160 रुपए हो गई है। सरसों तेल में भी जोरदार आग लगी है। 110 से 120 रुपए वाला यह तेल दो सौ रुपए के पार हो गया है। इसी तरह से सनफ्लावर और फल्ली तेल भी 50 से 60 फीसदी महंगे हुए हैं।

दालों की कीमत डेढ़ गुना

दालों की कीमत में भी 40 से 50 फीसदी तक का इजाफा हुआ है। राहल दाल की कीमत 70 से 75 रुपए थी, यह दाल 130 रुपए तक बिकी है। हालांकि इस समय इसकी कीमत 110-120 रुपए है। मूंगदाल तो 140 रुपए किलो तक गई है। इस समय यह 120 रुपए तक बिक रही है। काला चना 30 से 40 रुपए किलो बिकता था, यह अब 60 से 70 रुपए हो गया है। इसी तरह से दूसरी दालों में भी 30 से 40 फीसदी तक कीमतें बढ़ी हैं।

55 सौ का एलईडी टीवी 11 हजार में

इलेक्ट्रानिक सामनों में भी जमकर आग लगी है। पिछले साल तक लोकल 32 इंच का एलईडी टीवी 55 सौ रुपए में मिलता था, वह इस समय 11 हजार हो गया है। इसी तरह से कंपनियों के एलईडी टीवी के दाम भी बढ़े हैं। एसी में डेढ़ से दो हजार, कूलरों में पांच सौ से हजार रुपए, फ्रिज में एक से दो हजार तक कीमत बढ़ी है। इलेक्ट्रानिक के हर आइटम में रेट बढ़े हैं।

आयरन ओर में 200 फीसदी इजाफा

सबसे ज्यादा अगर किसी की कीमत में इजाफा हुआ है तो वह आयरन ओर है। पिछले साल अप्रैल में इसकी कीमत साढ़े तीन हजार रुपए थी, इस समय इसकी कीमत 12 हजार रुपए हैं। इसी तरह से 54 सौ का पैलेट इस समय 15 हजार पांच सौ रुपए में मिल रहा है। इसमें भी दो सौ फीसदी कीमत बढ़ी है। इसके असर से स्पंज आयरन 15 हजार पांच सौ से 29 हजार पांच सौ रुपए टन हो गया है। यानी इसमें करीब 90 फीसदी कीमत बढ़ी है। स्पंज आयरन महंगा होने से 27 हजार 800 रुपए में मिलने वाला सरिया इस समय 43 हजार 500 में मिल रहा है। यह बेसिक कीमत है, इसमें जीएसटी अलग है। सरिया में कीमत 60 फीसदी बढ़ी है।

सीमेंट में सौ रुपए का इजाफा

सीमेंट की बात करें तो यह पिछले साल 200 से 210 रुपए रहा है। लेकिन इसकी कीमत साढ़े तीन सा तक गई है। हालांकि इस समय मानसून में इसकी डिमांड कम हाेने के कारण कीमत तीन सौ से कम हाे गई है। इसी तरह से रेत और गिट्टी की कीमत भी बढ़ी है। ईंट और घर बनाने के काम में आने वाला हर सामान महंगा हुआ है। चाहे वह सेनेटरी सामान हो या फिर रंग पेंट हो।

पेट्रोल-डीजल में लगी आग

पेट्रोल और डीजल की कीमत में बहुत ज्यादा आग लग गई है। भले इसके लिए कहा जाता है कि इसकी कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार के हिसाब से तय होती है, लेकिन पिछले एक साल में जब भी इसकी कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में कम हुई है, इसका फायदा आम आदमी को न मिलकर केंद्र सरकार ने उठाया है और एक्साइज ड्यूटी में इजाफा करके इसकी कीमत को कम होने नहीं दिया है। आज तो कई राज्याें में पेट्रोल की कीमत सौ रुपए पार हो गई है। पेट्रोल और डीजल की कीमत ज्यादा होने का असर मालभाड़े पर पड़ा है और मालभाड़े के कारण भी बहुत से सामान महंगे हुए हैं।

रसोई गैस 50 फीसदी महंगी

रसोई गैस में भी जोरदार आग लगी है। पिछले साल मई माह की बात करें तो इसकी कीमत 594 रुपए थी। इस समय इसकी कीमत 956 रुपए है। यानी साल भर में इसकी कीमत में करीब तीन सौ रुपए का इजाफा हुआ है। कीमत में इतना इजाफा होने के बाद एक सबसे बड़ी परेशानी यह है कि पिछले सात माह से उपभोक्ताओं को सब्सिडी के नाम से महज 61.24 रुपए मिल रहे हैं। यह सब्सिडी तब की है जब कीमत छह सौ रुपए के आस-पास थी।

साबुन, आटा, मसालें भी महंगे

आम आदमी की जरूरत की चीजों में शामिल साबुन जैसी चीज भी दबे पांव महंगी कर दी गई है। नामी कंपनियों के साबुन जो चार, पांच और छह के पैंक में आते हैं। इनकी कीमत में 30 से 40 रुपए का इजाफा हुआ है। मसालों की कीमत में जहां 20 से 30 रुपए का इजाफा हुआ है, वहीं इसमें एक अलग तरह की मुनाफाखोरी भी हो रही है। कई पैकेटों को 200 ग्राम के स्थान पर 180 ग्राम का कर दिया गया है। ऐसा कई पैक सामानों में हो रहा है। 50 ग्राम के स्थान पर 35 से 40 ग्राम, सौ ग्राम के स्थान पर 80 से 90 ग्राम के पैक कर दिए गए हैं। इस तरफ आमतौर पर ग्राहक ध्यान ही नहीं देते हैं। आटा 130 से 140 रुपए मिलता था, वह इस समय 180 से 200 रुपए हो गया है।

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