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विधानसभा की आदिवासी सीटाें काे वापस पाने भाजपा की कवायद, बस्तर में बड़े नेता करेंगे मंथन

रायपुर(realtimes) विधानसभा के पिछले चुनाव में भाजपा के हाथ से बस्तर की एक सीट काे छाेड़कर सारी सीटें चली गई थी, बाद में एक बची सीट भी निकल गई। अब भाजपा ने मिशन 2023 के लिए आदिवासी सीटाें काे वापस पाने की कवायद प्रारंभ कर दी है। इसके लिए अगले माह बस्तर में राष्ट्रीय और प्रदेश के बड़े नेताओं के साथ एक बड़ी बैठक करने का फैसला किया गया है। इसमें प्रदेश सरकार को भी घेरने की रणनीति बनेगी।

बस्तर के सुकमा में धर्मांतरण के मामले में एसपी के लिखे पत्र के बाद भाजपा ने इसको बड़ा मुद्दा बना दिया है। अब इस मुद्दे को भुनाकर भाजपा ने आदिवासियों को एकजुट करने की रणनीति बनाने का काम प्रारंभ कर दिया है। धर्मांतरण के मुद्दे को लेकर भाजपा ने प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा तो खोला है, अब इसको लेकर आदिवासी नेता भी सक्रिय हो गए हैं। इसको बड़ा मुद्दा बनाकर भाजपा आदिवासियों के बीच में जाना चाहती है। इसको लेकर प्रदेश से लेकर दिल्ली में रणनीति बनाई जा रही है। एक दिन पहले ही दिल्ली में केंद्रीय मंत्री रेणुका सिंह के निवास पर लोकसभा का सत्र समाप्त होने पर भाेज के बहाने जहां सभी सांसदों को बुलाया गया, वहीं राष्ट्रीय सहसंगठन मंत्री शिवप्रकाश, प्रदेश प्रभारी डी. पुरंदेश्वरी, सहप्रभारी नवीन नितिन के साथ भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष विष्णुदेव साय और संगठन महामंत्री पवन साय भी उपस्थित रहे। सभी सांसदों ने जहां शिवप्रकाश ने जहां मिशन 2023 को लेकर उनकी राय पूछी वहीं, सभी से केंद्र सरकार की उपलब्धियों को लेकर अपने क्षेत्र में ज्यादा से ज्यादा प्रचार-प्रसार भी करने कहा गया। इस बैठक में आदिवासियों के धर्मांतरण को लेकर चर्चा करने के साथ बस्तर में चिंतन शिविर को लेकर भी चर्चा की गई।

आदिवासी सीटों पर फोकस

भाजपा को पिछले विधानसभा चुनाव में बस्तर की एकमात्र सीट भीमा मंडावी की मिली थी, लेकिन उनकी नक्सलियों द्वारा हत्या किए जाने के बाद सीट खाली हुई तो यह सीट भी कांग्रेस के खाते में चली गई। इस समय बस्तर में भाजपा का एक भी आदिवासी विधायक नहीं है। बस्तर में अगले माह होने वाले चिंतन शिविर में भाजपा धर्मांतरण के मुद्दे को सामने रखकर अभी से मिशन 2023 की तैयारी करने की रणनति बनाएगी। भाजपा इस शिविर में इसको लेकर भी मंथन करेगी कि आखिर किस कारण से आदिवासी सीटें उनके हाथ से निकल गईं। आदिवासियों की नाराजगी को दूर करने पर भी मंथन होगा।

रहेंगे बड़े नेता: मरकाम

भाजपा अनुसुचित जनजाति मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष विकास मरकाम का कहना है, बस्तर में धर्मांतरण को लेकर जिस तरह से सुकमा एसी का पत्र सामने आया है, उसके बाद यह साफ हो गया है कि बस्तर में बड़े पैमाने पर आदिवासियों का धर्मांतरण हो रहा है। इस मुद्दे के साथ आदिवासियों पर हो रहेे अत्याचार को लेकर एक चिंतन शिविर सितंबर के दूसरे सप्ताह में होगा। इसमें राष्ट्रीय स्तर के नेताओं के साथ प्रदेश के सभी बड़े नेता शामिल होंगे। इसमें प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने की रणनीति बनाएंगे।

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