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दूसरों की तलवारों से लड़कर मुकाबला जीतने वाली सीए भवानी देवी के बारे में सबकुछ जानें

स्पोर्ट्स डेस्क। टोक्यो ओलंपिक से पहले भारत में शायद ही किसी ने देश की महिला तलवारबाज सीए भवानी देवी का नाम सुना होगा। लेकिन टोक्यो ओलंपिक में देश के लिए इतिहास रचने वाली इस बेटी ने फेंसिंग (तलवारबाजी) में वो कीर्तिमान स्थापित कर डाले जिसके बारे में आज तक देश में किसी महिला ने नहीं सोचा होगा। सीए भवानी देवी ओलंपिक के इतिहास में पहला मैच जीतने व तलवारबाजी स्पर्धा में क्वालीफाई करने वाली पहली भारतीय महिला फेंसर हैं। भवानी देवी ने महिला के लिए खतरनाक और जोखिम भरे माने जाने वाले खेल फेंसिंग में उतरकर देश की लड़कियों के सामने मिसाल पेश की है। देश में अब तक फेंसिंग जैसे खेलों में डर के कारण बहुत कम लड़कियां शामिल हो पाती हैं लेकिन भवानी देवी के प्रदर्शन से इन लड़कियों को जरूर प्रेरणा मिलेगी। भवानी देवी ने भी टोक्यो ओलंपिक में दूसरे मैच में मिली हार के बाद कहा था कि मैं यहां हार जरूर गई हूं लेकिन पहला ओलंपिक होने के कारण ये मेरे लिए जीत के बराबर है। अगले ओलंपिक में मैं इससे भी ज्यादा बेहतर प्रदर्शन करूंगी।


सीए भवानी देवी तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई की रहने वालीं हैं। 27 वर्षीय भवानी देवी का पूरा नाम चडलवादा आनंद सुंदररमन भवानी देवी है। 27 अगस्त 1993 को जन्मीं भवानी देवी एक मध्यवर्गीय परिवार में पांच भाई-बहनों के साथ पली बढ़ी हैं। उनके दो भाई हैं और दो बहनें हैं। पिता चेन्नई में ही हिंदू मंदिर के पुजारी हैं। वहीं मां गृहिणी हैं। भवानी देवी ने 44 साल के तलवारबाजी के रिकॉर्ड को तोड़कर कॉमन वेल्थ चैंपियनशिप में तलवारबाजी के लिए देश को पहला स्वर्ण पदक दिलाया। वहीं दुनिया में शीर्ष 50 फेंसिंग रैंकिंग खिलाड़ियों में शामिल वे एकमात्र भारतीय हैं। 

भवानी देवी की फेंसिंग से मुलाकात 10 साल की उम्र में स्कूल में हुई। स्कूल में उन्हें स्पोर्ट्स चुनने के लिए कहा गया लेकिन सभी स्पोर्ट्स में सीट भर चुकी थी तो उनके लिए फेंसिंग का विकल्प बचा था जिसके बाद उन्होंने फेंसिंग को अपने स्पोर्ट्स करियर के रूप में चुन लिया। हालांकि परिवार की आर्थिक स्थिति उनके खेल के हिसाब से ठीक नहीं थी। क्योंकि तलवारबाजी करते हुए महंगे उपकरणों की जरूरत होती थी लेकिन इसके बावजूद भवानी देवी ने इस खेल में महारथ हासिल कर ही ली। 

भवानी देवी के जीवन की सबसे खास बात है कि उन्होंने इलेक्ट्रिक तलवार से ट्रेनिंग करने की बजाय बांस से तलवार बनाकर तैयार की। भवानी ने अपने पहले इलेक्ट्रिक उपकरण का इस्तेमाल तब किया जब उन्होंने एक राष्ट्रीय कार्यक्रम में भाग लिया। तब तक उसने कृपाण के बजाय केवल बांस के डंडे का इस्तेमाल किया था। जब अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को भारत के दक्षिण में इंडोर स्टेडियम में बिजली की तलवारों से अभ्यास करते थे तब भवानी देवी तपती धूप में ट्रेनिंग करती थीं। बताते हैं कि इलेक्ट्रिक तलवार महंगी होने के कारण उसे खरीदने के उनके पास पैसे नहीं थे। जिसके बाद वह अक्सर टूर्नामेंट के लिए जाते समय अन्य खिलाड़ियों से तलवारें उधार लेती थी।

भवानी देवी 8 बार की फेंसिंग में नेशनल चैंपियन हैं। वहीं भवानी देवी पांच साल पहले भी रियो ओलंपिक में क्वालीफाई करने से चूक गई थीं। हालांकि फेंसिंग में उन्होंने पांच साल बाद टोक्यो में आखिरकार वो कर दिखाया जिसके लिए अब तक भारतीय एथलीट सिर्फ सोचा ही करते थे। उनके प्रदर्शन के बाद पीएम मोदी ने भी ट्वीट कर उन्हें देश की प्रेरणा बताया था। वहीं पीएम मोदी ने कहा था कि तुम्हारी इस हार ने भी देश के लिए जीत जैसा गौरव दिया है। तुमने देश के लिए इतिहास रचा है। 
 

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