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इसी माह से महंगी बिजली का लगेगा कंरट

रायपुर(realtimes) प्रदेश के 55 लाख से ज्यादा बिजली उपभोक्ताओं को इसी माह से महंगी बिजली का कंरट लगना तय हाे गया है। हालांकि यह करंट ज्यादा तगड़ा नहीं हाेगा, क्याेंकि उपभोक्ताओं के साथ पॉवर वितरण कंपनी को भी राहत पहुंचाने के मकसद से छत्तीसगढ़ राज्य बिजली नियामक आयोग में नया टैरिफ तैयार किया जा रहा है।

एक तरफ पॉवर कंपनी ने छह हजार करोड़ का घाटा पूरा करने की मांग रखी है तो दूसरी तरफ उपभोक्ताओं ने जनसुनवाई में बिजली महंगी न करने की मांग रखी है। अब आयोग दोनों वर्गों को संतुष्ट करने की कवायद में लगा है, जिसकी वजह से जुलाई के अंतिम दिन भी नया टैरिफ जारी नहीं हो सका है। अब इसको अगले माह के पहले सप्ताह में जारी करने की तैयारी है, ताकि अगस्त से नया टैरिफ लागू किया जा सके। इतना तय माना जा रहा है बिजली की कीमत में इजाफा जरूर होगा अब यह इजाफा कितने फीसदी किया जाए इसको लेकर ही मंथन चल रहा है। संभावना है हर वर्ग के टैरिफ में थोड़ा-थोड़ा इजाफा किया जाएगा।

बिजली के नए टैरिफ पर नियामक आयोग में नए सिरे से काम चल जा रहा है। पुराने अध्यक्ष के रिटायर होने के बाद आए नए अध्यक्ष हेमंत वर्मा ने नए सिरे से प्रक्रिया काे प्रारंभ किया। सबसे पहले दो दिनों तक जनसुनवाई करके सभी का पक्ष सुना गया। हालांकि जनसुनवाई में गिनती के लोग ही आए। पर जो लोग भी पहुंचे सभी ने एक ही बात कही है कि टैरिफ में इजाफा न किया जाए।

पुराना घाटा छह हजार करोड़ का

पाॅवर कंपनी ने इस बार जो लेखा-जोखा आयोग को भेजा है, उसमें कंपनी ने 2021-22 में 16 हजार 580 करोड़ का खर्च अनुमानित बताया है। इसी के साथ 18 हजार 600 करोड़ का राजस्व मिलने की संभावना भी जताई है। ऐसे में कंपनी को दो हजार 20 करोड़ ज्यादा मिलेंगे। लेकिन इसी के साथ कंपनी ने आयोग को बताया है कि 2018 और 2019 में कंपनी को तय राजस्व से 6054 करोड़ कम मिले हैं। इस घाटे को पूरा करने की मंजूरी मांगी गई है।

बिजली का महंगा होना तय

आयोग में इस वक्त जो कवायद चल रही है, इसमें यह देखा जा रहा है कि पॉवर कंपनी को अपने पुराने घाटे में कितना घाटा पूरा करने की मंजूरी दी जाए। आयोग कंपनी को जितना घाटा पूरा करने की मंजूरी देगा, उसके हिसाब से ही नया टैरिफ तय होगा। यह तय माना जा रहा है, बिजली महंगी होगी। अब किस वर्ग की बिजली कितनी महंगी करने पर कंपनी को ज्यादा राजस्व मिलेगा, इस पर ही मंथन किया जा रहा है। इसी में ज्यादा समय लग रहा है। आयोग की ऐसी मंशा है कि किसी एक वर्ग पर ज्यादा भार न पड़े।

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