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सीमेंट की कीमत बेलगाम, कंपनियां मुनाफाखाेरी करने बढ़ा रही दाम

रायपुर(realtimes) छत्तीसगढ़ में करीब एक दर्जन सीमेंट कंपनियां हैं जो सीमेंट का उत्पादन करती हैं। देश भर में यहां से भारी मात्रा में सीमेंट जाता है। राज्य में भी यहां से सीमेंट की आपूर्ति होती है। मानसून के समय सीमेंट की खपत आधी हाे जाती है, लेकिन इसके बाद भी  इतिहास में पहली बार मानसून में सीमेंट की कीमत थोक में 310 रुपए हो गई है। इस कीमत को कम करने की बजाये सीमेंट कंपनियां और बढ़ाने की तैयारी में हैं। आज-कल में कीमत में 20 रुपए का इजाफा करने की तैयारी है। इसी के साथ कीमत को साढ़े तीन सौ रुपए तक ले जाने का टारगेट तय किया गया है। इसके पीछे का कारण बारिश में कम खपत में ज्यादा मुनाफा कमाना है। इसके लिए सीमेंट कंपनियों ने सिंडीकेट बना लिया है।

प्रदेश में सीमेंट की कीमत मार्च से आसमान पर है। फरवरी में मालभाड़ा को लेकर 23 दिनों तक चली हड़ताल के बाद से सीमेंट की कीमत को कंपनियों ने बढ़ाने का काम किया है। उस समय कीमत जो तीन सौ रुपए पार हुई तो अब तक कम नहीं की गई है। नान ट्रेड सीमेंट की कीमत में भी उस समय 40 रुपए का इजाफा किया गया था। तब कीमत 250 रुपए हो गई थी। यह कीमत इस समय 255 रुपए है। छत्तीसगढ़ कांट्रेक्टर संघ के अध्यक्ष बीरेश शुक्ला का कहना है, नान ट्रेड सीमेंट की कीमत कभी इतनी नहीं रही है। कीमत ज्यादा होने से हर काम की लागत में इजाफा हो गया है।

20 रुपए का इजाफा कभी भी

सीमेंट का थोक और चिल्हर कारोबार करने वालों का दावा है कि बारिश के मौसम में कभी सीमेंट की कीमत तीन सौ रुपए के पार नहीं हुई है। पहली बार कीमत इतनी ज्यादा चली गई है। अब तो कीमत को और बढ़ाने की तैयारी चल रही है। पहले मंगलवार की रात से कीमत में 20 रुपए का इजाफा करने की सूचना सभी को भेजी गई थी। लेकिन इसको अभी एक दिन के लिए टाल दिया गया है। अब संभावना है कि बुधवार की रात से 330 रुपए के हिसाब से बिलिंग होगी।

खपत कम, कीमत ज्यादा

सीमेंट के कारोबारियों का कहना है, बारिश में सरकारी कामों के साथ रीयल एस्टेट के कामों की रफ्तार भी बहुत धीमी हो जाती है। जो जरूरी मकान और निर्माण कार्य रहते हैं, वहीं होते हैं। करीब पचास फीसदी काम बंद होने से सीमेंट की खपत भी आधी हो जाती है। प्रदेश में रोज 45 हजार टन सीमेंट की खपत प्रदेश के साथ बाहर के राज्यों में जाने से होती है। जानकारों का कहना है,कम खपत में ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए सीमेंट कंपनियों ने एक तरह से सिंडीकेट बनाकर काम करना प्रारंभ किया है।

माल की किल्लत बताने का प्रयास

कारोबारियों का कहना है जिन कारोबारियाें को जितने माल की जरूरत है, उससे कम माल देकर माल की किल्लत बताने का प्रयास हो रहा है। रायपुर के साथ प्रदेश के दूसरे शहरों में कम माल दिया जा रहा है, जबकि बाहर भरपूर माल भेजा जा रहा है। जिनके काम अटके हुए हैं, उनको किसी भी कीमत पर सीमेंट लेने की मजबूरी है।

कीमत पर नियंत्रण करना राज्य सरकार का कामः काैशिक

नेता प्रतिपक्ष धरमलाल काैशिक का कहना है, सीमेंट की कीमत पर नियंत्रण करना राज्य सरकार का काम है। लेकिन ऐसा करने के बजाये कंपनियाों को ही सरकार संरक्षण दे रही है जिसके कारण कीमत बढ़ रही है। सरकार की शह पर रेत माफिया भी रेत की मनमानी कीमत

वसूल रहे हैं। हमारी सरकार के समय किसी काे छूट नहीं दी जाती थी, रेट पर सरकार का पूरा नियंत्रण था। लेकिन इस सरकार में भूपेश टैक्स के नाम पर सबकाे छूट दे कर रखी गई है।

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