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छत्तीसगढ़ में क्याें आ गई बिजली की खपत में कमी, जानिए वजह

रायपुर(realtimes) प्रदेश में अब तक बिजली की बेतहाशा खपत हो रही थी। खपत का ग्राफ साढ़े चार हजार मेगावाट तक चला गया था, पर जैसे ही मानसून की दस्तक हुई और जहां एक तरफ पारा गिरा, वहीं बिजली की खपत भी नीचे आ गई है। जून के पहले सप्ताह में जो खपत चार हजार मेगावाट से ज्यादा थी, वह इस समय तीन हजार के आस-पास आ गई है। गर्मी के मुकाबले अब खपत में 15 सौ मेगावाट तक गिरावट आ गई है।

प्रदेश में गर्मी के सीजन में बिजली की खपत 45 सौ मेगावाट के आस-पास रही है। इस बार लॉकडाउन के कारण अप्रैल और मई में मॉल, शापिंग कांप्लेक्स और बड़े व्यापारिक संस्थान बंद होने के बाद भी बिजली की खपत चार हजार मेगावाट से ज्यादा रही। इसके पीछे का कारण यह रहा कि भले बाजार में संस्थान बंद रहे, पर घरों में दिन रात एसी, कूलर चलने के कारण खपत ज्यादा रही। अगर लॉकडाउन नहीं होता तो इस बार बिजली की खपत पांच हजार मेगावाट तक जा सकती थी। हर साल गर्मी में बिजली की खपत 45 सौ मेगावाट पार हो जाती है, इस पर ऐसी स्थिति नहीं आई।

उत्पादन किया कम

छत्तीसगढ़ राज्य पावर कंपनी के पास बिजली की कोई कमी नहीं है। जहां कंपनी का अपना उत्पादन 2960 मेगावाट है, वहीं कंपनी को लारा की 800 मेगावाट की यूनिट से 300 मेगावाट बिजली मिल जाती है। इसी के साथ प्रदेश के निजी उत्पादकों से तीन से चार सौ मेगावाट बिजली लागत मूल्य पर मिलती है। सेंट्रल सेक्टर से भी दो हजार मेगावाट का शेयर है। कुल मिलाकर कंपनी के पास रोज साढ़े पांच हजार मेगावाट रहती है। इसमें से मड़वा के 500 मेगावाट की दो यूनिट की बिजली तेलंगाना को देने का अनुबंध है, पर तेलंगाना को लंबे समय से पूरी बिजली नहीं दे रहे हैं। कंपनी खपत के हिसाब से ही अपना उत्पादन कम ज्यादा करती है। इस समय खपत में कमी आने के बाद अपने 2960 मेगावाट में से हजार मेगावाट का उत्पादन कम कर दिया गया है।

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