State

रेत की जमकर जमाखोरी, 15 के बाद होगी मुनाफाखोरी

रायपुर(realtimes) प्रदेश में रेत खदानों में मानसूनी लाकडाउन लगने से पहले रेत की जमकर जमाखोरी हो रही है। जिसको जितना स्थान मिल रहा है, रेत का ढेर एकत्रित किया जा रहा है। 15 जून से खदानें बंद हो जाएंगी। पहली बारिश में ही कई खदानें बंद हो गई हैं। खदानें बंद होने के बाद जरूरतमंदों से ज्यादा कीमत वसूली जाएगी। पहले ही रेत की कीमत ज्यादा होने से आम आदमी के लिए घर बनाना महंगा हाे चुका है, अब रेत की कीमत की और मार पड़ने वाली है। आमतौर पर बारिश में 50 फीसदी से ज्यादा काम बंद हो जाते हैं, लेकिन जिनके काम जरूरी होते हैं, उनके काम चलते रहते हैं। इनको अपने काम के लिए कीमत भी ज्यादा देनी पड़ती है।

रेत का उत्खनन और परविहन वैसे भी कोरोना के कहर के कारण लगे लॉकडाउन में एक माह से ज्यादा समय तक प्रभावित रहा है। इसकी वजह से रेत का परिवहन करने वालों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। रेत का परिवहन करने वालों ने प्रदेश सरकार से यह मांग भी रखी है कि लॉकडाउन के कारण काम प्रभावित होने पर बड़ा नुकसान हो चुका है, ऐसे में जून में कम से 15 दिनों तक रेत खदानों से उत्खनन करके परिवहन करने की मंजूरी दी जाए, लेकिन शासन ने फिलहाल इस मांग पर कोई फैसला नहीं किया है। जानकारों की मानें तो मांग पूरी होने की संभावना भी नहीं है।

देनी पड़ेगी डबल कीमत

15 जून से रेत खदानों के बंद होने से रेत की कीमत आसमान पर जाएगी। इस माह से प्रारंभ से ही रेत का भंडारण करने की होड़ लगी है। जिसके पास जितना स्थान है, उनके यहां रेत का भंडारण किया जा रहा है। जिसको जहां स्थान मिल रहा है, वहां भरपूर मात्रा में रेत रखी जा रही है, ताकि मानसून में जमकर कमाई की जा सके। इस समय नया रायपुर में रेत की कीमत जहां 12 से 14 रुपए फीट है, वहीं रायपुर में यह 15 से 17 रुपए है। एक सप्ताह बाद इसकी कीमत डबल होने की संभावना है। इधर रीयल एस्टेट में भी जिनका काम चल रहा है, और वे अपना काम बारिश में भी जारी रखना चाहते हैं, उन लोगों ने भी रेत अपनी क्षमता के मुताबिक रेत भंडारण करने का काम प्रारंभ कर दिया है। सरकारी कामों के लिए रेत भी जमाकर रखी जा रही है, ताकि काम प्रभावित न हो और बाद में ज्यादा कीमत देकर रेत न लेनी पड़ी।

अपने मोबाइल पर REAL TIMES का APP डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लिक करें

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button