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खेल मैदान रोज रहते थे गुलजार, अब खिलाड़ियाें का कर रहे इंतजार

रायपुर(realtimes) कोरोना की दूसरी लहर ने खेल और खिलाड़ियाें काे भी अपने एक बार फिर से अपनी चपेट में ले लिया है। राजधानी के साथ प्रदेश के जो मैदान रोज गुलजार रहते थे, उनको अब खिलाड़ियों का इंतजार है।  प्रदेश में लगातार दूसरे साल दशकों से चले आ रहे खेल प्रशिक्षण शिविरों का सिलसिला भी टूट गया है।

कोरोना ने हर वर्ग काे प्रभावित किया है, इससे खेल भी अछूते नहीं हैं। जहां देश में राष्ट्रीय आयोजन रद्द कर दिए गए हैं, वहीं राष्ट्रीय चैंपियनशिप में खेलने जाने से पहले ही राज्य स्तरीय खेलों को भी रद्द कर दिया गया है। इसी के साथ खेल शिविरों को भी रोक दिया गया है। छत्तीसगढ़ के अलग राज्य बनने से पहले ही यहां पर करीब 30 साल से खेल विभाग हर जिले में ग्रीष्मकालीन प्रशिक्षण शि‌विरों का आयोजन करता रहा है। इन शिविरों ने प्रदेश को कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी दिए हैं। शिविरों पर पिछले साल को छोड़कर कभी विराम नहीं लगा था। पिछले साल शिविर नहीं हुए और अब फिर से इस साल भी ऐसा ही हो गया है।

46 साल बाद दूसरी बार शिविर नहीं

राजधानी में शेरा क्रीड़ा समिति ऐसी है, जिसमें पिछले 46 सालों से लगातार फुटबॉल का शिविर चला है। यही एक ऐसा शिविर है, जो महज ग्रीष्मकालीन ही नहीं, बल्कि पूरे सालभर चलता है। इसके संस्थापक मुश्ताक अली प्रधान बताते हैं, शिविर में कभी भी इतना लंबा ब्रेक नहीं लगा था। हमारे खिलाड़ी तो बारिश के मौसम में भी प्रशिक्षण शिविर में आते हैं, लेकिन कोरोना के कारण पिछले साल पहली बार ब्रेक लगा और फिर से कोरोना के कारण ही इस बार भी मार्च से ही शिविर बंद करने पड़े है।

हर जिले में लगते थे शिविर

प्रदेश का खेल विभाग हर जिले में पिछले 30 सालों से खेलों का ग्रीष्मकालीन शिविर लगाता रहा है। छत्तीसगढ़ के अलग राज्य बनने से पहले यहां पर क्षेत्रीय कार्यालय था, उसे मध्यप्रदेश से शिविरों के लिए बजट मिलता था। इसके बाद छत्तीसगढ़ बना तो प्रदेश के खेल एवं युवा विभाग ने इसका आयोजन प्रारंभ किया। हर जिले में आधा दर्जन से लेकर दाे दर्जन तक खेलों का शिविर लगता था। पूरे प्रदेश में पांच हजार से ज्यादा खिलाड़ी इसमें शामिल होते थे। इन शिविरों से लगने का पिछले साल से टूटा क्रम इस साल भी जारी है।

जिम भी बंद

प्रदेश में राजधानी सहित हर जिले में सरकारी के साथ निजी जिम भी बंद हाे गए हैं। प्रदेश में एक हजार से ज्यादा जिम हैं। इनमें जहां खिलाड़ी जाते हैं, वहीं कई वर्गों के लोग फिटनेस के लिए भी जाते हैं। अंतरराष्ट्रीय निर्णायक और प्रदेश के वीर हनुमान सिंह पुरस्कार प्राप्त संजय शर्मा और बॉडी बिल्डर मानिक ताम्रकार का कहना है, जिस तरह से अन्य संस्थानों को शर्तों के साथ खोलने की मंजूरी दी गई है, उसी तरह से जिम भी खोलने की मंजूरी मिलनी चाहिए। जिम का खुलना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि कोरोना के कहर से निपटने के लिए जिम अहम भूमिका निभा सकते हैं। जिम से लोगों में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाई जा सकती है। पहली लहर में भी जिम काे नियमों के तहत खोलने की मंजूरी दी गई थी।

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