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अब मॉल्स और सुपर बाजार खोलने की उठी मांग

रायपुर(realtimes) लॉकडाउन के पांचवें चरण में अनलॉक किए गए बाजार को देखते हुए अब मॉल्स और सुपर बाजार को भी खोलने की मांग उठने लगी है। एक दिन पहले ही वाहनों के शोरूम खोलने की इजाजत मिलने के बाद संभावना जताई जा रही है कि मॉल्स और सुपर बाजार पर भी सरकार मेहरबान हो सकती है। इनको संचालित करने वालों का कहना है, उनके यहां भीड़ को कंट्रोल करने के पूरे संसाधन हैं, सरकार मंजूरी देते हैं तो कोई परेशानी नहीं होने वाली नहीं है।

लॉकडाउन के कारण राजधानी के ही पांच मॉल्स को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इनके मेंटेनेंस पर हर माह 40 से 50 लाख का खर्च हो जाता है। जहां तक आमदनी का सवाल है, लॉकडाउन में फूटी-कौड़ी की आय नहीं हो रही है। मॉल्स के मालिकों को जहां माहभर में दो से पांच करोड़ तक का किराया मिल जाता है, वहीं एक मॉल में ही 20 से 25 करोड़ का कारोबार हो जाता है। रायपुर में अब तक करीब सवा सौ करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ है। इसी के साथ सुपर बाजारों की भी हालत खराब है। सुपर बाजार से आम आदमी को राहत रहती है। यहां पर सामान सस्ता मिलता है।

प्रदेश में भी लंबे समय से मॉल कल्चर ने महानगरों की तरह पैर पसारे हैं। मॉल्स का सबसे ज्यादा कल्चर राजधानी रायपुर में है। यहीं सबसे ज्यादा पांच मॉल हैं। पहले यहां आधा दर्जन मॉल थे, लेकिन अब एक बंद हो गया है। इसके बाद भिलाई में तीन और बिलासपुर और जगदलपुर में दो-दो, कांकेर में एक मॉल है। प्रदेश के अन्य शहरों में भी धीरे-धीरे मॉल्स कल्चर आता जा रहा है।

मेंटेनेंस ही पड़ रहा भारी

लॉकडाउन के कारण सभी मॉल की जान निकल गई है। एक मॉल के मेंटेनेंस पर ही 40 से 50 लाख खर्च हो जाता है। राजधानी के मॉल से जुड़े लोग बताते हैं। मॉल में उसकी साइज के हिसाब से खर्च कम ज्यादा हो जाता है। एक बड़े मॉल में हाउस कीपिंग पर 6 से 7 लाख, सुरक्षा गार्डों पर 7-8 लाख, तकनीकी स्टाफ पर 6 से 7 लाख और सबसे ज्यादा बिजली बिल पर बिजली का उपयोग न होने पर भी डिमांड चार्ज के रूप में 10 लाख तक का खर्च आ जाता है। इसी के साथ अन्य स्टॉफ का वेतन भी देना पड़ता है।

20 से 25 करोड़ तक टर्नओवर

राजधानी के मैग्नेटो, अंबुजा, सिटी सेंटर, 36 मॉल और कलर्स मॉल में हर माह 20 से 25 करोड़ का कारोबार होता है। 10 अप्रैल से लॉकडाउन लगा है। करीब सवा माह का समय हो गया है। ऐसे में इन मॉल में अब तक सवा सौ करोड़ का कारोबार प्रभावित हो गया है। ऐसा ही हाल प्रदेश के अन्य स्थानों के मॉल का है। इसी के साथ इन माॅल्स में काम करने वाले हजारों लोग पर रोजी-रोटी का संकट आ गया है।

सुपर बाजार भी खोलने की मांग

लॉकडाउन में सुपर बाजारों के बंद होने से आम आदमी को ज्यादा परेशानी हो रही है। डी-मार्ट जैसे बाजार में सामान काफी सस्ते दामों पर मिलता है। इन सुपर बाजारों में एमआरपी से कम कीमत में सामान मिल जाता है, लेकिन किराने की दुकानों पर एमआरपी पर ही माल बेचा जाता है। यही वजह है कि सुपर बाजारों को भी खोलने की मांग होने रही है।

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