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राजधानी में बिजली व्यवस्था को वापस बहाल करने में हजार कर्मी जुटे तब 20 घंटे में व्यवस्था पटरी पर लाैटी

रायपुर(realtimes) आंधी तूफान का सबसे बड़ा प्रभाव बिजली पर पड़ता है। एक बार बिजली गुल हुई तो उसको ठीक करने में भारी परेशानी आती है। आंधी तूफान में तो पेड़ाें के तारों पर गिरने के कारण पूरी व्यवस्था गड़बड़ हो जाती है। ऐसा ही रविवार को आई आंधी और तूफान में हुआ।

राजधानी रायपुर में आंधी-तूफान के कारण मची तबाही के कारण पाॅवर कंपनी के पचास से ज्यादा फीडरों में खराबी आई। इस खराबी को रविवार ठीक करने के लिए हजार से ज्यादा कर्मचारियों और अधिकारियों ने मोर्चा संभाला। 20 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद जाकर पूरी व्यवस्था ठीक हो सकी।

प्रदेश भर में रविवार को अचानक मौसम में हुए बदलाव के आंधी-तूफान चला और इसके कारण पूरा शहर ही तहस-नहस हो गया। सबसे बड़ी समस्या बिजली को लेकर आई। आंधी तूफान के कारण जहां 50 से ज्यादा स्थानों के तार टूट गए, वहीं करीब 50 फीडरों में पेड़ गिरने से फीडरों में खराबी आई। खराबी आने की देर नहीं थी कि पाॅवर कंपनी का पूरा अमला अपने-अपने क्षेत्र में भारी बारिश और आंधी तूफान के बीच ही काम पर जुट गया। राजधानी में सबसे बड़ी खराबी रायता के 400 केवीए के स्टेशन में आई थी। इसमें खराबी के कारण ही रायपुर के साथ बस्तर संभाग के पूरे जिलों के साथ कई जिलों में ब्लैक आउट हुआ। इस ब्लैक आउट को महज आधे धंटे में ठीक कर लिया गया, लेकिन बाकी व्यवस्था को ठीक करने के लिए मशक्कत करनी पड़ी।

हटाए पेड़, जोड़े तार

राजधानी में बिजली व्यवस्था बहाल करने का काम तो रविवार को ही कर दिया गया था। जिन फीडरों में ज्यादा खराबी थी, वहां के फीडरों में दूसरे फीडरों से सप्लाई लेकर उस फीडर के क्षेत्र को रौशन किया गया। जहां रविवार की रात भर काम चला, वहीं सोमवार की सुबह साढ़े छह बजे से लेकर शाम को छह बजे तक काम किया गया। इस बीच हजार कर्मियों के बल ने 33 केवीए के एक दर्जन फीडर, 11 केवी के तीन दर्जन से ज्यादा फीडरों में गिरे पेड़ों को हटाकर सारे फीडरों को ठीक किया। इसके अलावा करीब 50 स्थानों पर तार टूटे थे। इनको भी ठीक करने का काम किया गया।

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