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रायपुर पूरा लाकः साढ़े चार सौ टन की आवक और खपत, सब्जी, फल उत्पादक, विक्रेताओं को लगेगा लाखों का फटका

रायपुर(reaaltimes) लॉकडाउन के कारण राजधानी रायपुर के सब्जी और फल उत्पादकों के साथ विक्रेताओं को इस बार बड़ा नुकसान होने वाला है। रायपुर में दोनों को मिलाकर साढ़े चार सौ टन से ज्यादा की आवक रोज होती है। इसी के साथ इतनी ही खपत भी हो जाती है। इतनी खपत में जहां जहां उत्पादकों और थाेक विक्रेताओं को लाखओं का नुकासन होगा, वहीं चिल्हरो वालों को हजारोंं का फटका लगेगा।

रायपुर में जहां नवरात्रि को देखते हुए इस समय फलों की सबसे ज्यादा करीब तीन सौ टन आवक रोज की हो गई है, वहीं सब्जियां भी लाेकल और दूसरे राज्यों की मिलाकर करीब डेढ़ सौ टन आ जाती है। यहां पर कोल्ड स्टोरेज की व्यवस्था न होने के कारण सब्जियों और फलों को स्टॉक करके भी नहीं रखा जा सकता है। लॉकडाउन के 9 दिनों में स्टोरेज को लेकर आम आदमी को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

राजधानी रायपुर में शुक्रवार की शाम से लॉकडाउन लग गया है। अब यह 19 अप्रैल की सुबह तक जारी रहेगा। अगर लॉकडाउन आगे नहीं बढ़ा तो 19 अप्रैल को सब फिर से खुल जाएगा। लेकिन लॉकडाउन के 9 दिन सब्जी और फल उत्पादकों के लिए सबसे घातक साबित होने वाले हैं। एक तो इनका माॅल नहीं बिकेगा, साथ ही माल को गोल्ड स्टोरेज में रखने की व्यवस्था न होने के कारण उत्पादक और उसके विक्रेता माल को स्टॉक करके नहीं रख सकते हैं। लॉकडाउन में जिन लोगों ने अपने घरों के लिए सब्जी और फल लिए हैं, उनके सामने भी इनको स्टोरेज करने की परेशानी होगी, क्योंकि सब्जी और फलों को ज्यादा से ज्यादा एक सप्ताह ही रखा जा सकता है। यही वजह है लोगों ने इसका ज्यादा स्टॉक नहीं लिया है।

तीन सौ टन फल

थोक फल संघ के विजय चौधरी के मुताबिक रायपुर में रोज फलों की आवक 20 से 25 ट्रक यानी ढाई सौ से तीन टन रोज होती है। इसमें से ज्यादा फल बाहरी राज्यों से आते हैं। जहां तक अपने प्रदेश का सवाल है तो यहां से जाम, केला, खरबूज और तरबूज ही आते हैं। वैसे तो आम भी आते हैं, पर अभी लोकल आम की आवक प्रारंभ नहीं हो सकी है। ऐसे में लॉकडाउन में लोकल उत्पादकों को ज्यादा परेशानी नहीं होगी, लेकिन बाहर के उत्पादकों का माल यहां न आने के कारण उनको जरूर नुकसान उठाना पड़ेगा।

सब्जी की डेढ़ सौ टन रोज आवक

रायपुर में सब्जी की रोज की आवक डेढ़ सौ टन के करीब है। इसमें लोकल के साथ बाहर की सब्जियां भी शामिल हैं। लोकल उत्पादन में टमाटर, गोभी, फूल गोभी, भिड्डी, बरबट्टी, करेला, कुदरू, धनिया, मिर्ची सहित कई सब्जियां शामिल हैं। ऐसे में लोकल उत्पादकों को 9 दिनों तक बड़ा नुकसान होने वाला है। इसी के साथ जिन विक्रेताओं के पास स्टॉक बचेगा, उनको भी नुकसान उठाना पड़ेगा। थोक सब्जी व्यापारी संघ के टी. श्रीनिवास रेड्डी के मुताबिक गोल्ड स्टोरेज की व्यवस्था न होने से परेशानी होती है। लेकिन सब्जियों को ज्यादा समय तक गोल्ड स्टोरेज में रखा भी नहीं जा सकता है।

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