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एसी, फ्रिज, कूलर कारोबारियों की सांसें अटकीं, लाकडाउन से कंगाल होने का खतरा

रायपुर(realtimes)कोरोना के लगातार आक्रामक होते तेवर के कारण अंततः राजधानी रायपुर में भी लाकडाउन लग गया है। ऐसा होने से राजधानी के सैकड़ों एसी, फ्रिज और कूलर के थोक और चिल्हर कारोबारियों के कंगाल होने का खतरा हो गया है। कारोबारियों ने बैंकों और बाजार से लाखों, करोड़ों का कर्ज लेकर माल का स्टॉक कर रखा है। पिछले साल लाकडाउन के कारण इनका पूरा कारोबार चौपाट हो गया था, एक बार फिर से ऐसा होने की संभावना नजर आने लगी है। सीजन में छह सौ करोड़ से ज्यादा का कारोबार हो जाता है।

प्रदेश में एसी, फ्रीज और कूलर का बड़ा कारोबार होता है। गर्मी के सीजन के साथ इसी समय शादियों का सीजन भी रहता है। ऐसे में यहां पर इस सीजन में जमकर खरीदारी होती है। पिछले साल तो कोरोना के कारण एक पैसे का कारोबार नहीं हो सका था। जिन कारोबारियों ने पहले से स्टॉक करके रखा था, उनका पूरा पैसा ही जाम हो गया था। यह जाम स्टॉक पिछले साल जाकर नवरात्रि और दीपावली के समय बिक पाया था। लेकिन इसमें एक बड़ी परेशानी यह रही कि थाेक कारोबारियों का जो माल चिल्हर कारोबारियों ने खरीदा उनका पूरा पैसा अब तक नहीं मिल पाया है।

करोडों का स्टॉक

कारोबारियों ने जब देखा कि पिछले साल दिसंबर से ही कोरोना का कहर कम हो गया है तो उन्होंने इस बार गर्मी के लिए भारी स्टॉक मंगा लिया। बड़े कारोबारियों ने पांच से दस करोड़ तक का स्टॉक मंगा लिया है। वैसे भी कारोबारी गर्मी के लिए मॉल का आार्ड दिसंबर और जनवरी में देकर मॉल मंगा लगा लेते हैं, क्योंकि इस समय कई बड़ी कंपनियां स्कीम चलाती हैं। लेकिन इसी के साथ यह भी रहता है कि कंपनी मॉल का पूरा पैसा एडवांस में लेती है। इसके लिए व्यापारी बैंकों की सीसी लिमिट का लाभ उठाकर मॉल ले लेते हैं। जब मॉल बिक जाता है तो बैंकों का पैसा ब्याज के साथ वापस कर देते हैं।

अब तक 25 फीसदी कारोबार

आमतौर पर एसी, फ्रिज और कूलर की ज्यादा बिक्री अप्रैल और मई में होती है। इस बार मार्च से गर्मी पड़ने के कारण मार्च के दूसरे सप्ताह से बाजार में बिक्री की गर्मी आने लगी। लेकिन अचानक मार्च के तीसरे सप्ताह से कोरोना का कहर बढ़ना प्रारंभ हो गया। अब तो यह भयानक रूप लेता जा रहा है। कारोबारियों का कहना है, अब तक मुश्किल से 25 फीसदी कारोबार हो सका है। कारोबार का पीक समय तो अब आने वाला है। ऐसे समय में लाकडाउन ने कारोबारियों की जान निकाल दी है।

बिकते हैं चार लाख कूलर

प्रदेश में गर्मी के सीजन में करीब चार लाख कूलर बिकते हैं। इसमें से करीब एक लाख कूलर ब्रांडेड कंपनियों के और तीन लाख लोकल कूलर हैं। जहां ब्रांडेड कंपनियों के कूलर की कीमत 6 से 10 हजार तक है, वहीं लोकल कूलर 5 से 7 हजार तक बिकते हैं। कुल मिलाकर करीब ढाई सौ करोड़ का कारोबार इनका होता है। इसके प्रदेश में करीब सौ बड़े थोक कारोबारी और हजारों चिल्हर कारोबारी है।

ढाई सौ करोड़ का एसी कारोबार

एसी कारोबारियों के मुताबिक प्रदेश में सभी तरह के एसी को मिलाकर गर्मी के सीजन में 65 से 70 हजार एसी बिकते हैं। एक एसी की कीमत औसत 35 हजार के आसपास है। एसी का काराेबार दो से ढाई सौ करोड़ का होता है। इसके राजधानी रायपुर सहित प्रदेश में सौ से ज्यादा थोक और बड़ी संख्या में चिल्हर कारोबारी है। सबसे ज्यादा एसी अप्रैल और मई में बिकते हैं।

फ्रिज का व्यापार सौ करोड़ का

प्रदेश में सभी कंपनियों की फ्रिज को मिलाकर सालभर में इसका दो से ढाई सौ करोड़ का व्यापार होता है। इसमें से 40 फीसदी यानी करीब सौ करोड़ का व्यापार गर्मी के सीजन में होता है। व्यापारियों का कहना है, गर्मी में होने वाले कारोबार से इस बार हम लोग कम से कम वंचित नहीं होंगे ऐसी संभावना थी, लेकिन एक बार फिर से लाकडाउन ने टेंशन बढ़ा दी है।

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