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राष्ट्रीय सम्मान से पुरस्कृत होंगी जय माँ दुर्गा महिला स्वसहायता समूह की महिलाएं

ग्रामीण क्षेत्र में बेहतरीन कार्य करने के लिए केन्द्रीय ग्रामीण, विकास मंत्री करेंगे सम्मानित

रायपुर(realtimes) अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर दीनदयाल अन्त्योदय योजना के अंतर्गत राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, ग्रामीण आजीविका संभाग एमओआरडी द्वारा विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय सम्मान समारोह में बेहतरीन कार्य करने के लिए राजनांदगांव जिले के ग्राम खुटेरी के जय माँ दुर्गा महिला स्वसहायता समूह को 8 मार्च को सम्मानित किया जाएगा। वर्चुअल मोड में आयोजित इस सम्मान समारोह में केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर जय माँ दुर्गा स्वसहायता समूह की महिलाओं को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित करेंगे।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अनिला भेंड़िया ने जय माँ दुर्गा स्वसहायता समूह की महिलाओं को इस गौरवपूर्ण उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए विशेष पहल की जा रही है। राज्य के गौठानों में महिला समूहों की आर्थिक गतिविधियों के संचालन के लिए इंतजाम किए गए हैं, इससे महिलाएं आर्थिक रूप से स्वावलंबी बन रही है। जय माँ दुर्गा स्वसहायता समूह की महिलाओं ने आर्थिक आजादी के साथ समाज को जागरूक बनाने का कार्य कर एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है।

उल्लेखनीय है कि इस अवसर पर देश के 30 महिला स्वसहायता समूह तथा 10 ग्राम संगठन को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जाएगा। जिनमें से राजनांदगांव जिले के जय माँ दुर्गा महिला स्वसहायता समूह को यह गौरव प्राप्त हुआ है। समूह की अध्यक्ष श्रीमती लोकेश्वर साहू हैं और सभी ने मिलकर रेडी टू ईट उत्पाद बनाने का कार्य शुरू किया। इसके लिए बैंक से, ग्राम संगठन से और सखी कलस्टर से ऋण लिया गया। समूह की महिलाओं ने 16 कुपोषित बच्चों को गोद लिया और वहीं उन्हें खिचड़ी, फल, दूध, मुर्रा लड्डू, चना एवं रेडी टू ईट से हलवा बनाकर खिलाया करते थे। जिनमें से 14 बच्चे अभी सुपोषित हो गए हैं। राजनांदगांव परियोजना ग्रामीण-1 के 8 समूहों ने मिलकर ग्राम भर्रेगंाव में 8 जोड़ों की शादी करवाई। वहीं आंगनबाडियों में गर्भवती महिलाओं की गोदभराई एवं बच्चों के वजन त्यौहार में सक्रियता पूर्वक भाग लेते हैं। समूह की महिलाओं की गांव को ओडीएफ बनाने की दिशा में सक्रिय भागीदारी रही है। वे गांव में स्वच्छता, डबरी निर्माण एवं अन्य क्षेत्रों में कार्य कर रही हैं। स्वच्छ ग्राम बनाने के लिए स्वच्छता रैली भी समूह की महिलाओं द्वारा निकाली गई। मतदाता शिक्षा एवं मतदाता सहभागिता (स्वीप) तथा ग्राम के प्रत्येक मतदाता को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए समूह की महिलाओं द्वारा कठिन परिश्रम किया गया। समूह की महिलाओं द्वारा किशोरी बालिकाओं को माहवारी के समय सैनेटरी पैड का उपयोग करने के लिए इसके लाभ बताए गए। इसके साथ ही वे बच्चों की स्वच्छता की महत्ता के लिए भी जनसामान्य में जागरूकता ला रही हैं।

समूह में शामिल होने के पहले सभी महिलाएं कृषि एवं श्रम कार्यों से जुड़ी हुई थी। समूह से जुड़कर उनके व्यक्तित्व में आए व्यापक परिवर्तन को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। समूह की महिलाओं द्वारा बचत एवं वित्तीय लेन-देन में भागीदारी से उनकी आर्थिक स्थिति सशक्त हुई है। उन्होंने अपने समाज एवं परिवार में एक विशेष स्थान बनाया है और उनके पारिवारिक सदस्य तथा ग्रामवासी उनकी संभावनाओं पर विश्वास करते हैं। 15 दिन में वे रेडी टू ईट का निर्माण करती हैं और प्रति सदस्य 2 हजार रूपए की आय उन्हें प्राप्त होती है। इसके साथ ही वे विभिन्न आजीविका संबंधी गतिविधियों से जुड़ी हुई हैं।

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