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भूपेश के बजट की हाइट के रमन ने निकाले ये अर्थ… पढ़िए क्या कहा…

बजट की सामान्य चर्चा में रमन ने कहा- जमीन पर नहीं दिख रही योजनाएं

रायपुर(realtimes) छत्तीसगढ़ विधानसभा में बजट की सामान्य चर्चा में पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा कि सरकार ने जो हाईट समझा और जिसे जनता ने जाना है, उसमें बहुत अंतर है। उन्होंने कहा कि वित्तमंत्री के रूप में मुख्यमंत्री ने कल अपने बजट में जिस हाईट शब्द का उल्लेख किया, दरअसल वह उनके सलाहकारों और अधिकारियों द्वारा उनको भ्रम में रखने वाली ऊंचाई है। ये आकंडों में कितनी ही हाईट बना लें, लेकिन जनता की नजर में इनकी हाईट कहां जा रही है। उन्होंने कहा कि बजट के साइज को बोनसाई बना दिया गया। यह बजट पिछले बजट का बोनसाई बन गया है। बोनसाई कहने का आशय यही है कि यदि लक्ष्य को छुएगा नहीं, तो जमीन पर योजनाएं कैसे दिखेंगी?

वर्ष 2021-22 के बजट की सामान्य चर्चा की शुरुआत करते हुए डॉ. रमन सिंह ने कहा कि राज्य की जनता के लिए इस हाईट का असली अर्थ है, एच मतलब हाॅलो यानी यह पूरी तरह खोखला बजट है। जनता के कल्याण, राज्य के आर्थिक विकास के बारे में मौन है। ई मतलब एक्सक्लूसीनरी यानी प्रदेश के बड़े वर्ग का यह बजट है। गरीब, युवा, बेरोजगार, महिला, अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग बजट प्रावधान से अछूता है। आई का मतलब इमपरफेक्ट यानी केवल पिछले साल के बजट में आंकड़े बदलकर पेश कर दिया है। सरकार की नीति और कार्ययोजना का अभाव इस बजट में दिखाई दे रहा है। बजट में शरीर को सुंदर दिखाया गया है, लेकिन मन और आत्मा नदारद है। जी का मतलब गवर्नेंस गल्टी यानी यह बजट सरकार के प्रशासनिक व्यय के बढ़ते भार की पोल खोलता है। एच मतलब हॉरर, प्रस्तुत बजट के आंकड़े अब डराने लगे हैं। राजकोषीय स्थिति सरकार की बेकाबू होती दिख रही है। ऐसे में जल्दी वह स्थिति आएगी, जब सरकार के पास अपने कर्मचारियों, अधिकारियों को वेतन देने के पैसे नहीं रहेंगे, जनकल्याण और विकास की योजनाओं पर इसका असर पड़ने लगा है। टी मतलब टेरिबल, वेरीअन प्लीसेंट यह बजट किसी वर्ग को संतुष्ट करने वाला नहीं है। किसानों को चुनावी घोषणापत्र के वायदों का लाभ नहीं मिल रहा। बेरोजगारों युवाओं से सरकार धोखा कर रही है। शराब बंदी के वायदे को भूलकर शराब की आमदनी से सरकार चल रही है।

आमदनी अठन्नी, खर्चा रुपया

कांग्रेस सरकार के तीनों बजट को देखें, तो इसमें लगातार वित्तीय घाटा बढ़ता ही जा रहा है। पहले वर्ष 10 हजार 881 करोड़, दूसरे वर्ष 11 हजार 581 करोड़ और तीसरे वर्ष में 17 हजार 461 करोड़ का वित्तीय घाटा अनुमानित है। साल दर साल वित्तीय घाटा बढ़ने से सरकार की स्थिति आमदनी अठन्नी और खर्च रुपया की तरह हो गई है। उन्होंने कहा कि हमारे 15 साल के शासनकाल में कभी वित्तीय घाटा नहीं रहा। वित्तीय अनुशासन एफआरबीएम एक्ट की सीमा में रहा।

घाटे का रिकार्ड बना रही सरकार

उन्होंने कहा कि सरकार को न सदन की चिंता है और न ही सदन में पारित एक्ट की। वित्तीय घाटे की सीमा 3 फीसदी से बढ़ाकर 5 फीसदी की थी, लेकिन 2019-20 में ही वित्तीय घाटा 5 फीसदी से भी आगे बढ़ गया है। वर्ष 2020-21 में 6.52 प्रतिशत के बराबर रखा गया है। पिछले दो सालों में सरकार ने राजस्व आधिक्य का अनुमान रखा, लेकिन 2019-20 में 9 हजार 609 करोड़ का राजस्व घाटा सामने आया। चालू वित्त वर्ष में 12 हजार करोड़ से ज्यादा का घाटा होने का अनुमान है। सरकार घाटे का रिकार्ड बना रही है।

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