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किराये पर लिये गये हेलिकॉप्टर में सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर उठे सवाल

रायपुर(realtimes) छत्तीसगढ़ विधानसभा में राज्य सरकार द्वारा किराये पर लिये गये हेलिकॉप्टर में सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर सवाल उठे। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने प्रश्नकाल में सवाल किया कि पिछले दो वर्षों में सरकार ने किन-किन कंपनियों से हेलिकॉप्टर किराये पर लिया। कंपनियों को किस दर से कितना भुगतान किया गया और अभी कितना भुगतान किया जाना शेष है।

जवाब में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि पिछले दो वर्षों में छह कंपनियों से 288 दिनों के लिए हेलिकॉप्टर किराये पर लिये गये। इस पर 14 करोड़ 40 लाख 26 हजार 684 रुपए का भुगतान हुआ है। दो एविएशन कंपिनयों को एक करोड़ 72 लाख 98 हजार 310 रुपये का भुगतान शेष है। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा कि अनुबंध सूची में शामिल सीजी एविएशन एक प्रोपाइटर कंपनी है। किराये पर हेलिकॉप्टर देने के लिए एनएसओपी (नान शेड्यूल्ड ऑपरेटर) परमिट होना चाहिए, जो इस कंपनी के पास नहीं है। यह तो सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि एविएशन कंपनियों से यह अनुबंध 2013 में हुए थे, जिस कंपनी से बात हो रही है, वह एनएसओपी परमिट वाली कंपनी से अनुबंधित है। भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री आपकी सुरक्षा की चिंता कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं आप सबको धन्यवाद देता हूं जो इस ओर ध्यान दिलाया। इसकी समीक्षा कर ली जाएगी। सुरक्षा में कोई ढील नहीं होगी।

दो पहलवानों को निपटने दें

पहले ही सवाल पर पूर्व मुख्यमंत्री और मुख्यमंत्री के बीच हाे रहे सवाल-जवाब  पर महंत ने कहा, इस संयोग पर मुझे कुंवर बेचैन की कुछ पंक्तियां याद आ रही हैं। कुछ प्रश्न ऐसे होते हैं जो पूछे नहीं जाते और कुछ उत्तर ऐसे होते हैं जो बताए नहीं जाते। भाजपा सदस्य अजय चंद्राकर ने कुछ टिप्पणियां की तो खाद्यमंत्री अमरजीत भगत ने कहा कि आप काहे दाल-भात में मूसलचंद बन रहे हैं। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. महंत ने कहा कि दो पहलवानों को आपस में निपटने दीजिए।

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