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कौशिक ने भूपेश को बताया पत्रजीवी मुख्यमंत्री, भूपेश बोले- अन्याय होगा तो हजार बार लिखेंगे पत्र

रायपुर(realtimes) राज्यपाल के अभिभाषण पर सदन में चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने सरकार को आड़े हाथ लेते हुए  कहा कि सरकार के पास बताने के लिए कुछ नहीं है। पूरे भारत में सबसे ज्यादा पत्र लिखने वाला कोई मुख्यमंत्री हैं तो वह भूपेश बघेल हैं। पत्रजीवी मुख्यमंत्री है। इस पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष मुझे पत्रजीवी कह रहे हैं। छत्तीसगढ़ के अनुसूचित वर्ग, किसान, आदिवासियों के साथ यदि अन्याय होगा तो एक बार क्या हजार बार पत्र लिखेंगे। अपने लोगों को उनके अधिकारों से वंचित होने नहीं देंगे।

विधानसभा में राज्यपाल अभिभाषण पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि यह प्रदेश किसानों का प्रदेश है, इसलिए शुरुआत से ही प्रदेश में धान खरीदी को लेकर ऐसा कोई सत्र नही रहा जिस पर चर्चा नहीं हुई हो। हमारी सरकार धान खरीदी में पूरी पारदर्शिता से काम कर रही है। दुर्भाग्य की बात है कि किसानों की उपज को समर्थन मूल्य पर खरीदी की बात जिस दल के लोग कर रहे हैं, उस दल की सरकार दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन पर ध्यान नहीं दे रही है। किसान उन तीन कानूनों को नहीं चाहते इसे थोपने की जरूरत क्या है।

नेता प्रतिपक्ष कह रहे हैं कि हमने धान पर 2500 रुपये नहीं दिया। सरकार बनते ही हमने 2500 रुपये दिया। हमने कर्ज माफ भी किया, लेकिन केंद्र सरकार ने नियम का अड़ंगा लगा दिया। विपक्ष के नेता जन घोषणा पत्र का रट्टा मार लिए है। सोते जागते घोषणा पत्र ही दिखता है, दरअसल इन्हें बर्दाश्त नही हो रहा। 15 सालों तक शासन करने वाले धड़ाम से गिरे और 15 सीटों पर सिमट गए, इसलिए इन्हें पीड़ा होती है। घोषणा पत्र से यदि सरकार बनती तो अजीत जोगी जी में चांदी को सड़क बनाने का वादा किया था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को सुविधा हो इसलिए हमने 363 नए उपार्जन केंद्र बनाये. बारदाने की कमी के बावजूद सुव्यवस्थित ढंग से खरीदी संचालित होती रही। केंद्र सरकार ने 60 लाख मीट्रिक टन चावल जमा करने की सहमति दी थी तब डॉ. रमन सिंह ने ट्वीट कर कहा था कि मुझे धन्यवाद देना चाहिए। मैंने कहा था कि जिस दिन 60 लाख मीट्रिक टन चावल जमा हो जाएगा तो मैं धन्यवाद दूंगा। अब फिर कह रहा हूँ जिस दिन 60 लाख मीट्रिक टन चावल ले लिया जाएगा पूरा सदन धन्यवाद देगा।

रमन राजनीतिक रूप से आईसोलेट

रमन सिंह के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने अच्छा भाषण दिया उन्होंने कहा के रंगहीन गंधहीन, स्वाद हीन अभिभाषण वास्तव में यह लक्षण कोरोना के ही है। कहीं फिर तो नहीं होने वाला है। उन्होंने कहा कि वैसे भी वे राजनीतिक रूप से आइसरेलेट कर दिए गए हैं राज्य और केंद्र में उनकी पूछ परख नहीं है। उन्हें स्वाद नान में आता था, रंग तो खनिज में दिखता था और चिटफंड कंपनियों से गंध आता था। 9 साल तक राजनांदगांव में नकली यूरिया की सप्लाई हो रही थी।

केंद्र के पैसे से हो रहा विकास

नेता प्रतिपक्ष ने चर्चा के दौरान कहा कि नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि राज्यपाल से झूठ कहलाया गया। जन घोषणा पत्र के अधिकांश वादों को पूरा किये जाने की बात सामने आ रही है, लेकिन हकीकत कुछ और है. झूठ की बुनियाद पर यह सरकार टिकी हुई है। एक भी किसान ऐसा नहीं है, जो ये कहे कि उनके खाते में धान के समर्थन मूल्य का पूरा 2500 रुपये चला गया. घोषणा पत्र में बकाया बोनस देने का भी वादा था, लेकिन इस सरकार के कार्यकाल में राज्यपाल का ये तीसरा अभिभाषण था, एक में भी बोनस दिए जाने का जिक्र तक नहीं है। 60 साल उम्र से अधिक के लोगों को पेंशन, पूर्ण शराबबंदी, महिला स्व-सहायता समूह के लिए किये गए वादों का क्या हुआ? उन्होंने कहा कि अभिभाषण में इसका जिक्र किया गया कि आठ महीनों तक नि:शुल्क चावल का वितरण किया गया. ये चावल राज्य ने नहीं दिया, ये केंद्र सरकार का दिया हुआ चावल है. पंचायतों को जो दो-दो क्विंटल चावल दिया गया, वह भी 14वें वित्त आयोग से आई राशि से किया गया। पंचायतों से एडवांस चेक कटाकर मांगा गया। मनरेगा में अब तक 300 करोड़ से ज्यादा का भुगतान नहीं हुआ है। नाखून काटकर शहीद होने वाली बात है कि कोरोनाकाल में सबसे ज्यादा रोजगाए छत्तीसगढ़ ने दिया। मनरेगा के तहत रोजगार भी मोदी सरकार की नीतियों के तहत दिया गया।

जहां उंगली रखों वहीं छेद

कौशिक ने कहा कि छत्तीसगढ़ में सिंचाई घटी है. बोधघाट परियोजना को पहले इसी सरकार ने बंद किया था और आज इसी परियोजना को ला रहे हैं. कल तक मुख्यमंत्री के साथ बैठने वाले लोग ही आज इसका विरोध कर रहे हैं. गोधन न्याय योजना के तहत 10 हज़ार से कम भुगतान पाने वाले 1 लाख 53 हज़ार लोग हैं। दिन भर गोबर इक_ा करने के बाद किसान को औसत 45 रुपए मिल रहा है। किसानों को 71 करोड़ का भुगतान किया है, लेकिन अब तक 71 लाख का जैविक खाद्य नहीं बेचा है। इस सरकार में ऐसा ही काम हो रहा है. शराब पर लिया जा रहा सेस भी इन योजनाओं में खर्च नहीं हो रहा है।

नेशनल फ़ेमिली हेल्थ पर सिर्फ़ दो फ़ीसदी की कमी आई है और कुल खर्च हुआ है 15 अरब रुपए। पूरे प्रदेश में कुपोषण से सुपोषण का जो डंका बजाया जा रहा है. इसकी हकीकत सामने है। जब प्रदेश में प्राथमिकता से अभियान चलाया जा रहा है तो यह आकंडा सामने है. इस सरकार में जहां उंगली रखोगे वहीं छेद है।

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