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किसानों की आत्महत्या पर सदन में हंगामा, वाकआउट

रायपुर(realtimes) छत्तीसगढ़ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक के सवाल पर कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने कहा कि पिछले एक साल में प्रदेश के 141 किसानों ने आत्महत्या की है। मुआवजे और कार्रवाई की मांग पर चर्चा के दौरान सदन में हंगामा हो गया। भाजपा के नाराज विधायकों ने सदन की कार्यवाही से वॉकआउट किया।

नेता प्रतिपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने कहा कि बीते एक साल में 141 किसानों ने आत्महत्या की है। आत्महत्या के अलग-अलग कारण रहे हैं। केशकाल के किसान धनीराम मरकाम की आत्महत्या मामले में अभिलेख दुरुस्ती और फसल की गिरदावरी में गलती पाई गई थी। इस मामले में पटवारी डोंगर नाग को निलंबित कर दिया गया है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि 141 किसानों की आत्महत्या एक गंभीर मामला है। इन मामलों में परिजनों को न्याय मिलना चाहिए। इन मामलों की जांच होनी चाहिए और परिजनों को उचित मुआवजा मिलना चाहिए। जवाब में कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने कहा कि किसानों की आत्महत्या राजनीति का मुद्दा नहीं। दुर्भाग्य से भाजपा इस पर राजनीति करना चाह रही है। भाजपा शासनकाल में बड़ी संख्या में किसानों ने आत्महत्या की थी, आज भी उनकी मौत पर मुआवजे का कोई प्रावधान नहीं है।

कृषि मंत्री के जवाब पर भाजपा विधायक भड़क गये। अजय चंद्राकर ने कहा कि सरकार केवल गुमराह कर रही है। उन्हें बताया जाए कि सरकार मुआवजा देना चाहती है या नहीं। विधायकों ने कहा कि सरकार की नीतियों की वजह से किसान आत्महत्या कर रहे हैं। जवाब में कांग्रेस विधायक धनेंद्र साहू ने कहा कि भाजपा की सरकार के समय हजारों किसानों ने आत्महत्या की। आप लोगों ने एक रुपये का भी मुआवजा दिया हो तो बताएं। कांग्रेस विधायकों ने कहा, तब आत्महत्या करने वाले किसानों को शराबी, जुआरी और प्रेम प्रसंग में पड़ा व्यक्ति बताया गया। इस हमले से भड़के नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा, सरकार किसानों का अपमान कर रही है।

नकली कीटनाशक बेचने वालों को संरक्षण देने में राजनांदगांव का नाम

भाजपा विधायक शिवरतन शर्मा ने दुर्ग जिले के मातोरडीह गांव के किसान दुर्गेश निषाद की आत्महत्या का जिक्र किया। उन्होंने कहा, उस किसान ने फसल को रोग से बचाने के लिए तीन बार दवाई का छिड़काव किया। नकली दवाई की वजह से बीमारी ठीक नहीं हुई और किसान ने आत्महत्या कर लिया। ऐसे नकली दवाई बेचने वालों पर क्या कार्रवाई हुई। जवाब में कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने कहा कि वह एकमात्र मामला था जिसमें आत्महत्या करने वाले किसान ने सुसाइड नोट छोड़़ा था। उसके बाद क्षेत्र की कीटनाशक बेचने वाली दुकानों की जांच की गई। एक दुकान को तो 50 से अधिक दिन बंद रखा गया। भाजपा से जुड़ी उस दुकान को राजनांदगांव से संरक्षण मिल रहा था। मैं उनका नाम नहीं लेना चाहता, लेकिन ऐसा हुआ है।

राजनांदगांव का नाम आने के बाद भड़की भाजपा

मामले में राजनांदगांव का नाम आने के बाद भाजपा विधायक भडक़ गये। भाजपा विधायकों ने हंगामा कर दिया। नारेबाजी शुरू हो गई। नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा, मंत्री इस मामले में गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। हम उनके जवाब से संतुष्ट नहीं हैं। ऐसे में हम बहिर्गमन कर रहे हैं। उसके बाद भाजपा विधायक दल कार्यवाही छोड़कर बाहर निकल गया।

भाजपा शासन काल में सात्वना देने गए कांग्रेसियों के खिलाफ मामला

धरमलाल कौशिक ने कहा-सरकार के पास इतना भी वक़्त नही है कि आत्महत्या करने वाले किसानों के घर जाकर सांत्वना दे दे। सहानुभूति पूर्वक सरकार को आर्थिक मदद के बारे में सोचना चाहिए। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि पिछली सरकार में चंद्रशेखर साहू कृषि मंत्री थे। उन्हीं के गांव में एक किसान ने आत्महत्या कर ली थी, तब धनेंद्र साहू प्रदेश अध्यक्ष थे। उनके नेतृत्व में हम उस गांव में गए थे। हम सबके खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया गया था। हम पेशी में खड़े होते थे। कांग्रेस विधायक धनेंद्र साहू ने कहा कि-पिछली सरकार में मैंने ये सवाल लगाया था कि आत्महत्या करने वाले कितने किसानों को मुआवजा दिया गया। मुझे तब जवाब दिया गया था कि एक भी किसान को मुआवजा नहीं दिया गया।

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