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भाजयुमो कार्यकारिणी से 35 प्लस की छुट्टी संभव

कुछ जिलाध्यक्षों के साथ अपात्र भी हो सकते हैं बाहर

रायपुर . प्रदेश भारतीय जनता युवा मोर्चा में जिन 35 प्लस को रखा गया है, अब उनकी छुट्टी होने की संभावना है। इसी के साथ कुछ जिलाध्यक्ष भी बाहर हो सकते हैं। इसके अलावा कुछ पदाधिकारियों को अपात्र बताकर जिनकी शिकायत की गई है, उनको भी बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। प्रदेश प्रभारी डी. पुरंदेश्वरी के फरमान पर हर पदाधिकारी के साथ जिलाध्यक्षों की कुंडली बनाई गई है। अब तैयार की गई कुंडली को प्रदेश प्रभारी को सौंपा जाएगा।

प्रदेश प्रभारी डी. पुरंदेश्वरी के 12 और 13 फरवरी को दो दिनों के दौरे में उनके सामने सबसे बड़ा मामला भाजयुमो में नियुक्तियों का आया। पहले ही दिन जब मोर्चा के पदाधिकारियों की बैठक ली गई तो भाजयुमो के प्रभारी और सहप्रभारी ने नियुक्तियों के मामले में हाथ खड़े कर दिए। ऐसे में अध्यक्ष अमित साहू को दिल्ली से रायपुर बुलाकर उनसे प्रदेश प्रभारी ने नियुक्तियों में मचे बवाल पर बात की। इस समय प्रभारी और सहप्रभारी भी साथ थे। अंत में प्रदेश प्रभारी ने फैसला सुनाया कि उनको हर पदाधिकारी के साथ जिलाध्यक्षों की पूरी कुंडली बनाकर दी जाए।
कुंडली तैयार
प्रदेश प्रभारी को जहां दूसरी राजनीति पार्टियों से आए कुछ को पदाधिकारी बनाने की शिकायत मिली, वहीं कुछ नए युवाओं और 35 साल से ज्यादा के लोगों को भी रखने की शिकायत की गई है। ऐसे करीब एक दर्जन पदाधिकारी हैं। इनमें करीब आधा दर्जन 35 साल से ज्यादा के पदाधिकारी हैं। ऐसे में जो कुंडली तैयार की गई है, उसमें हर पदाधिकारी के साथ जिलाध्यक्षों का पूरा बॉयोडाटा है। इसमें विशेष रूप से उनकी जन्मतिथि, भाजपा में कब से हैं, किस-किस पद पर रहे हैं। पदों में रहते हुए उनकी सक्रियता क्या रही है। इसी के साथ शिक्षा और पारिवारिक जानकारी भी दी जाएगी।
इनके बाहर होने की संभावना
भाजपा के जानकारों का कहना है, आमतौर पर भाजपा में एक बार नियुक्ति के बाद फेरबदल की संभावना नहीं रहती है, लेकिन यहां पर अब मामला दूसरा है। प्रदेश प्रभारी के पास जिस तरह की शिकायतें गईं हैं, और उनके सामने जिस तरह से भाजपा के दिग्गज नेताओं ने भी नियुक्तियों को लेकर आपत्ति की है, साथ ही प्रदेश के कई जिलाध्यक्षों ने भी अपने-अपने जिलों में बिना उनकी सहमति और जानकारी के भाजयुमो के जिलाध्यक्षों की नियुक्ति करने की बात रखी है, उससे तय माना जा रहा है कि प्रदेश प्रभारी पदाधिकारियों की कुंडली देखने के बाद प्रदेश कार्यकारिणी के साथ जिलाध्यक्षों में भी फेरबदल कर सकती हैं।

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